अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान के लिए बड़ी कूटनीतिक मुश्किल खड़ी कर दी है. पाकिस्तान के ईरान से करीबी रिश्ते हैं, वहीं खाड़ी के उन देशों से भी उसके संबंध हैं जो इस संघर्ष से जुड़े हुए हैं. ऐसे में इस्लामाबाद के लिए किसी एक पक्ष की तरफ खुलकर जाना आसान नहीं है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुद देश की इस स्थिति को “टाइटरोप वॉक” यानी रस्सी पर चलने जैसा संतुलन बताया है.
ख्वाजा आसिफ ने क्यों बताया पाकिस्तान का हाल मुश्किल?
ख्वाजा आसिफ ने Geo News को दिए इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान को अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संपर्क बनाए रखना होगा. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए यह देखना जरूरी है कि वह इस संघर्ष में कितनी दूर तक जा सकता है और कहां संयम बरत सकता है.
आसिफ ने कहा, “पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ी परीक्षा है. हमें यह देखना होगा कि इस संघर्ष में हम कितनी दूर तक जा सकते हैं, कहां संयम बरत सकते हैं और क्या हम इससे पूरी तरह दूर रहने की स्थिति में भी हैं.” इसके बाद उन्होंने कहा, “इन सभी बातों को देखते हुए, मेरे विचार में पाकिस्तान के लिए यह रस्सी पर चलने (tightrope walk) जैसी स्थिति है.”
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ईरान और Gulf देशों दोनों से रिश्ते, इसलिए बढ़ी दुविधा
ख्वाजा आसिफ ने साफ कहा कि पाकिस्तान के ईरान और खाड़ी देशों (Gulf countries) दोनों के साथ करीबी संबंध हैं. उन्होंने कहा, “इस संघर्ष में शामिल सभी खाड़ी देशों के साथ हमारे भाईचारे के संबंध हैं और दूसरी तरफ ईरान के साथ भी हमारे करीबी रिश्ते हैं. ये संबंध हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.”
यही पाकिस्तान की सबसे बड़ी परेशानी है. एक तरफ उसका पड़ोसी ईरान है, जिसके साथ उसके राजनीतिक और सुरक्षा संबंध हैं. दूसरी तरफ खाड़ी के वे देश हैं, जिनके साथ पाकिस्तान के लंबे समय से करीबी संबंध रहे हैं. ऐसे में किसी एक पक्ष का खुलकर साथ देना पाकिस्तान के लिए मुश्किल स्थिति पैदा कर सकता है.
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आसिफ के मुताबिक पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान दोनों से संपर्क करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा, “हमने दोनों पक्षों से संपर्क करने की कोशिश की है और उनसे बात करने की कोशिश की है.” यानी पाकिस्तान फिलहाल दोनों पक्षों के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखना चाहता है.
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक गुंजाइश (diplomatic space) को बचाकर रखना चाहता है. वह ऐसे किसी कदम से बचना चाहता है, जिससे भविष्य में बातचीत या समझौते की उसकी संभावनाएं कम हो जाएं.
पाकिस्तान के लिए आगे की राह क्या?
ख्वाजा आसिफ ने इस संकट में किसी एक पक्ष का साथ देने का सीधा ऐलान नहीं किया. इसके बजाय उन्होंने बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकलने की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद बनाए रखनी चाहिए कि आगे बढ़ने का कोई रास्ता जरूर निकलेगा.”
