इधर मिडिल ईस्ट में तनाव, उधर अमेरिका ने कोरिया में शुरू किया युद्धाभ्यास, क्या है US का प्लान?

US South Korea Military Drill: अमेरिका और साउथ कोरिया ने साझा सैन्य अभ्यास शुरू किया है. इसके जरिए वह उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों से पैदा होने वाले खतरे का मुकबला करने का अभ्यास करता है. हालांकि, इस अभ्यास के दौरान ही अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में उलझा हुआ है, ऐसे में यह कुछ और इशारे भी कर रहा है.

US South Korea Military Drill: अमेरिका एक ओर ईरान के साथ मिडिल ईस्ट में उलझा हुआ है. दोनों देश जमकर एक दूसरे पर हमले कर रहे हैं. हालांकि, ईरान को अपनी जमीन पर नुकसान झेलना पड़ रहा है, लेकिन अमेरिका के सैन्य बेस पर ही ज्यादा खतरा है, वो भी पश्चिम एशिया के अरब देशों में. इस बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने सोमवार को एक बड़े संयुक्त सैन्य अभ्यास की शुरुआत की है. इस अभ्यास का नाम फ्रीडम शील्ड है, जिसमें हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं. यह अभ्यास 19 मार्च तक चलेगा और इसका उद्देश्य दोनों देशों की संयुक्त रक्षा क्षमता को मजबूत करना बताया जा रहा है.

दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ्स ने जानकारी दी कि इस अभ्यास में करीब 18,000 दक्षिण कोरियाई सैनिक भाग ले रहे हैं. हालांकि, अमेरिका ने दक्षिण कोरिया में तैनात अपने सैनिकों की संख्या सार्वजनिक नहीं की है जो इस सैन्य अभ्यास में शामिल होंगे. सैन्य अधिकारियों का कहना है कि यह अभ्यास संभावित सुरक्षा खतरों से निपटने और दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के लिए किया जा रहा है.

यहां के हथियार ईरान युद्ध में भेज सकता है अमेरिका

यह संयुक्त अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है, जब दक्षिण कोरियाई मीडिया में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि अमेरिका अपने कुछ सैन्य संसाधनों को दक्षिण कोरिया से हटाकर पश्चिम एशिया में भेज सकता है. रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिका ईरान से जुड़े बढ़ते तनाव के कारण अपनी सैन्य तैनाती को नए सिरे से संतुलित कर सकता है. हालांकि, दक्षिण कोरिया में तैनात अमेरिकी सेना के मुख्यालय युनाइटेड स्टेड्स फोर्सेज कोरिया ने इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी देने से इनकार किया है.

दोनों देशों ने इस पर टिप्पणी नहीं की

अमेरिकी सेना ने पिछले सप्ताह कहा था कि सुरक्षा कारणों से वह अपने सैन्य संसाधनों की आवाजाही या तैनाती से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकती. इसी तरह दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने भी इस बात पर टिप्पणी करने से बचा है कि क्या अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल सिस्टम या अन्य रक्षा उपकरणों को पश्चिम एशिया भेजा जा रहा है. हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि इससे दोनों देशों की संयुक्त रक्षा रणनीति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा.

इस अभ्यास से भड़क जाता है उत्तर कोरिया

इस बीच, इस अभ्यास को लेकर उत्तर कोरिया की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है. उत्तर कोरिया लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को अपने खिलाफ आक्रमण की तैयारी बताता रहा है. उत्तर कोरिया अक्सर ऐसे अभ्यासों के जवाब में मिसाइल परीक्षण या सैन्य प्रदर्शन बढ़ा देता है. वहीं अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि फ्रीडम शील्ड जैसे सैन्य अभ्यास पूरी तरह से रक्षात्मक प्रकृति के होते हैं और इनका मकसद क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना तथा संभावित खतरों के खिलाफ संयुक्त तैयारी को मजबूत करना है.

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अभ्यास का विरोध भी हो रहा

सोमवार को सियोल में अमेरिकी दूतावास के पास कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस संयुक्त सैन्य अभ्यास के विरोध में बैनर लेकर प्रदर्शन भी किया. इस बीच उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया के साथ दूरी बनाए रखी है, लेकिन संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ संबंध बेहतर हो सकते हैं. उत्तर कोरिया ने 2019 में किम जोंग उन और उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई शिखर वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ लगभग सभी अहम बातचीत रोक दी थी. इसके बाद हाल के वर्षों में क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया.

उत्तर कोरिया, अमेरिका के साथ सुधारना चाहता है संबंध!

इस दौरान किम जोंग उन ने अपने परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया और रूस के साथ सैन्य सहयोग भी बढ़ाया. रिपोर्टों के मुताबिक यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को उत्तर कोरिया से सैनिकों और हथियारों की मदद भी मिली. हाल ही में प्योंगयांग में हुई एक बड़ी राजनीतिक बैठक में किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया के प्रति सख्त रुख दोहराया, लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रखने की बात भी कही. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को बातचीत से पहले उत्तर कोरिया से परमाणु निरस्त्रीकरण की शर्त हटानी चाहिए.

घट गई है एक्सरसाइज की संख्या

फ्रीडम शील्ड अभ्यास अमेरिका और दक्षिण कोरिया के दो बड़े वार्षिक कमांड पोस्ट अभ्यासों में से एक है. एक फ्रीडम शील्ड है, दूसरी उलची फ्रीडम शील्ड है (यह परमाणु खतरों से मुकाबला करने के लिए डिजाइन किया गया है). फ्रीडम शील्ड का मकसद कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए युद्ध जैसी परिस्थितियों में दोनों देशों की संयुक्त सैन्य क्षमता का परीक्षण करना है. इसके साथ वॉरियर शील्ड नाम से फील्ड ट्रेनिंग भी होती है, हालांकि इस साल फील्ड अभ्यासों की संख्या पहले (51) की तुलना में कम (22) कर दी गई है.

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कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अभ्यासों को कम करने का उद्देश्य उत्तर कोरिया के साथ संभावित कूटनीतिक बातचीत के लिए माहौल बनाना भी हो सकता है. इस महीने के अंत तक या अप्रैल में ट्रंप चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं. दक्षिण कोरिया के नेताओं की उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान प्योंगयांग से उसके रिश्ते सुधारने का मौका मिल सकता है. 

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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