अमेरिकी सेना ने छोड़ा अल-असद एयरबेस, ईराकी सेना ने जमाया कब्जा, ईरान से ‘वॉर लाइक सिचुएशन’ के बीच ऐसा क्यों किया?

ईराक का ऐन अल-असद एयरबेस अमेरिकी सेना का ऑपरेशन इराकी फ्रीडम के दौरान दूसरा सबसे बड़ा सैन्य हवाई अड्डा था. जनवरी 2010 से 2026 अमेरिकी सेना की कई टुकड़ियां यहां तैनात रहीं. 2024 में ईराक और अमेरिका के बीच एक समझौते के तहत अब US आर्मी ने इस बेस से अपने सैनिकों को निकाल लिया है.

अमेरिकी सैनिकों ने इराक के ऐन अल-असद एयरबेस से अपनी वापसी पूरी कर ली है. इराक के रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि पश्चिमी इराक में स्थित यह एयरबेस अब पूरी तरह इराकी सेना के नियंत्रण में है. यह वॉशिंगटन और बगदाद के बीच 2024 में हुए समझौते के तहत हो रहा है. इस समझौते में यह तय किया गया था कि अमेरिका की लीडरशिप वाले मिलिट्री ऑपरेशंस को बंद किया जाएगा. अमेरिकी सेना ईराक से फेजेज में वापस जाएगी. इसकी जगह दोनों देशों के बीच सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने पर सहमति बनी थी. शुरुआती योजना के अनुसार सितंबर 2025 तक सैकड़ों सैनिकों की वापसी होनी थी, जबकि शेष सैनिकों को 2026 के अंत तक पूरी तरह वापस बुलाया जाना था.

इराकी सेना के एक कर्नल ने एयरबेस से अमेरिकी सैनिकों की वापसी की कंफर्म करते हुए कहा कि कुछ लॉजिस्टिक (रसद संबंधी) कारणों से अभी कुछ सैनिक वहां मौजूद हैं. सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने इससे ज्यादा जानकारी देने से मना कर दिया. हालांकि, अमेरिकी सैनिकों की वापसी कब शुरू हुई, इसकी जानकारी साफ नहीं हो सकी. 

ऐन अल-असद एयरबेस कई वर्षों से अमेरिकी और गठबंधन सैनिकों की मेजबानी कर रहा था. मिडिल ईस्ट के इस एरिया में तनाव बढ़ने के दौरान यह अड्डा कई बार ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के हमलों का निशाना भी बना है. खासकर 2020 में अमेरिकी हमले में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद. अमेरिका इस समय ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति में है. ट्रंप लगातार उसके ऊपर हमले की धमकी दे रहे हैं. अमेरिका ने पिछले साल- 2025 के जून महीने में यहां बमबारी भी की थी. इसमें ईरान के न्यूक्लियर हथियारों वाले स्थान को निशाना बनाया गया था. ईरान में इस समय वायलेंट प्रोटेस्ट्स हो रहे हैं. इसके बावजूद अमेरिका ने अपने सैनिकों को हटा लिया है.

अमेरिका सेना की कौन-कौन सी टुकड़ी यहां तैनात रही

अमेरिकी सेना का ऐन अल-असद एयर बेस इराक में ऑपरेशन इराकी फ्रीडम के दौरान दूसरा सबसे बड़ा सैन्य हवाई अड्डा था. जनवरी 2010 तक यह II मरीन एक्सपेडिशनरी फोर्स/मल्टी-नेशनल फोर्स वेस्ट का मुख्यालय था. यहां अमेरिका की कई सेनाएं तैनात रह चुकी हैं. इनमें 3rd डिवीजन की 4th IBCT, 82nd एयरबोर्न डिविजन एडवाइज एंड असिस्ट ब्रिगेड, 332nd मेडिकल ब्रिगेड, 321st सस्टेन्मेंट ब्रिगेड, वर्टिकल ऑनबोर्ड डिलीवरी डिटैचमेंट-1, VAQ-141, नेवी कस्टम्स बटालियन जूलियट, इराकी सेना की 7th डिवीजन के कुछ हिस्से और अमेरिकी वायु सेना शामिल रही हैं. 

ट्रंप ने भी इस बेस का दौरा किया था

दिसंबर 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी पत्नी मेलानिया ने यहां तैनात सैनिकों का दौरा किया. नवंबर 2019 में उपराष्ट्रपति माइक पेंस और उनकी पत्नी कैरन भी थैंक्सगिविंग से पहले सैनिकों से मिलने आए. जनवरी 2020 में, अमेरिकी ड्रोन हमले में कुद्स फोर्स के नेता कासेम सोलैमानी की हत्या के जवाब में, इस एयर बेस पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमला हुआ. अमेरिकी नेतृत्व वाले ‘ग्लोबल कोलिशन अगेंस्ट दाईश’ के सैन्य मिशन के समाप्त होने के बाद, ऐन अल-असद से अमेरिकी सैनिकों की वापसी सितंबर 2025 में शुरू हुई और जनवरी 2026 में पूरी तरह समाप्त हो गई,

अमेरिका ने ईराक के ऐन अल-असद एयरबेस को क्यों छोड़ा?

वॉशिंगटन और बगदाद ने 2024 में यह तय किया था कि इराक में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ लड़ रही अमेरिकी गठबंधन सेना को सितंबर 2025 तक धीरे-धीरे वापस बुलाया जाएगा, क्योंकि अब इस्लामिक स्टेट अब काफी कमजोर हो गया है. सीरिया में भी अमेरिका समर्थित सरकार है. ईराक भी समर्थन के लिए तैयार है, जहां आईएस का काफी प्रभाव था. ऐसे में अमेरिकी सैनिक उन जगहों से चले गए. इन क्षेत्रों में अमेरिकी सेना के कुछ सलाहकार और मदद करने वाले कर्मचारियों का एक छोटा ग्रुप मौजूद था. इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने अक्टूबर में कहा था कि एग्रीमेंट के अनुसार सितंबर तक पूरे अमेरिकी सैनिक एयर बेस से जाने थे. लेकिन सीरिया में हाल की घटनाओं के कारण वहां 250 से 350 लोग सुरक्षा और सलाह देने के लिए थोड़े समय तक रहना जरूरी हो गया. 

इराकी सेना ने बेस पर जमाया कब्जा

अब सभी अमेरिकी सैनिक एयर बेस से चले गए हैं. अमेरिकी सेना की ओर से इस वापसी पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. हालांकि, अमेरिकी सैनिक अभी भी उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र और पास के सीरिया में मौजूद हैं. एबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सभी अमेरिकी सैनिक एयर बेस से जा चुके हैं और उन्होंने अपना सारा उपकरण भी हटा लिया है. इराकी सेना के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अब्दुल अमीर राशिद यारल्लाह ने शनिवार को अमेरिकी सेना के जाने के बाद एयर बेस पर अलग-अलग सैनिक इकाइयों के काम और जिम्मेदारियों को देखरेख की. सेना ने बयान में कहा कि यारल्लाह ने अधिकारियों को कहा कि वे मेहनत तेज करें, सब मिलकर काम करें और एयर बेस की पूरी ताकत और रणनीतिक जगह का उपयोग करें. 

ईराक अब मिलिशिया गुटों पर हथियार छोड़ने का दबाव बनाएगी

अमेरिकी सेना के जाने से इराकी सरकार उन गैर-सरकारी मिलिशिया गुटों को हथियार छोड़ने के लिए दबाव डाल सकती है, जो अब तक अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी का फायदा उठाकर अपने हथियार रख रहे थे. प्रधानमंत्री अल-सुदानी ने जुलाई में कहा था कि जब अमेरिकी गठबंधन पूरी तरह लौट जाएगा, तो “स्टेट की परमिशन के बिना किसी भी ग्रुप को हथियार रखने की जरूरत या वजह नहीं होगी.”

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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