जेल में बंद इन 3 ईरानी महिला पत्रकारों को संयुक्त राष्ट्र ने पुरस्कार देने की घोषणा की

पुरस्कार पाने वाली महिलाओं के नाम हैं- नीलोफर हमीदी, एलाहेह मोहम्मदी और नरगिस मोहम्मदी. नीलोफर ने एक खबर के जरिये 22 वर्षीय महसा अमीनी के बारे में लोगों को अवगत कराया था, जिनकी पिछले साल सितंबर में मृत्यु हो गयी थी.

संयुक्त राष्ट्र ने ‘सच्चाई और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता के लिए’ दिये जाने वाले अपने प्रमुख पुरस्कार को जेल में बंद तीन ईरानी महिला पत्रकारों को दिये जाने की घोषणा की है. यह घोषणा प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की गयी है.

नीलोफर हमीदी,एलाहेह मोहम्मदी व नरगिस मोहम्मदी को मिला पुरस्कार

पुरस्कार पाने वाली महिलाओं के नाम हैं- नीलोफर हमीदी, एलाहेह मोहम्मदी और नरगिस मोहम्मदी. नीलोफर ने एक खबर के जरिये 22 वर्षीय महसा अमीनी के बारे में लोगों को अवगत कराया था, जिनकी पिछले साल सितंबर में मृत्यु हो गयी थी. अमीनी को ठीक से हेडस्कार्फ न पहनने के लिए नैतिकता पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था. एलाहेह ने अमीनी के अंतिम संस्कार के बारे में लिखा था. अमीनी की मौत ने ईरान के शहरों में महीनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत कर दी. 2009 के हरित आंदोलन के विरोध प्रदर्शनों के बाद से इस्लामिक गणराज्य को अमीनी की मौत के विरोध में प्रदर्शनों की भीषण चुनौती का सामना करना पड़ा जब कई लोग सड़कों पर उतर आये थे.

महिला पत्रकारों का समर्थन जरूरी

तीसरी विजेता नरगिस मोहम्मदी ने एक पत्रकार के रूप में कई वर्षों तक काम किया और ईरान की सबसे प्रमुख कार्यकर्ताओं में से एक हैं. संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन विश्व प्रेस स्वतंत्रता पुरस्कार के लिए गिलर्मो कैनो को चुना गया है, जो एक कोलम्बियाई पत्रकार थे. कैनो की 17 दिसंबर, 1986 को बोगोटा में उनके अखबार एल एस्पेक्टाडोर के कार्यालय के सामने हत्या कर दी गई थी. यूनेस्को ने 1997 से तीन मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुरस्कार प्रदान करना शुरू किया है. यूनेस्को के महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने न्यूयॉर्क में एक समारोह में विजेताओं की घोषणा करते हुए कहा, अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है कि उन सभी महिला पत्रकारों का समर्थन किया जाए जिन्हें अपना काम करने से रोका जाता है और जिन्हें खतरों और हमलों का सामना करना पड़ता है.

पुरस्कार पाने वाली पत्रकारों ने महिला क्रांति का नेतृत्व किया

विजेताओं का चयन करने वाली मीडिया पेशेवरों के अंतरराष्ट्रीय जूरी की अध्यक्ष जैनब साल्बी ने कहा कि तीन विजेताओं के बहादुर काम ने एक ऐतिहासिक महिला क्रांति का नेतृत्व किया. साल्बी ने कहा, उन्होंने खबर लिखने और सच्चाई बताने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए भारी कीमत चुकाई.उन्होंने कहा, “और उसके लिए हम उनका सम्मान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि जब तक वे सुरक्षित और मुक्त नहीं हो जातीं, तब तक दुनियाभर में उनकी आवाज़ें गूंजती रहेंगी.

नरगिस मोहम्मदी 16 साल से जेल में हैं

अमीनी की मौत के महीनों बाद तक चली सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पत्रकारों की गिरफ्तारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई आलोचनाओं को जन्म दिया. यूनेस्कों के अनुसार, हमीदी और मोहम्मदी दोनों सितंबर से ईरान की एविन जेल में हैं और हमीदी एकांत कारावास में हैं. नरगिस मोहम्मदी को अधिकारियों द्वारा बार-बार हिरासत में लिया गया और कैद किया गया. यूनेस्को ने कहा कि वह वर्तमान में एविन जेल में 16 साल कारावास की सजा काट रही हैं. नरगिस ने अपने काम के जरिए विदेशों में पहचान हासिल की. उनके कामों में ईरान में मृत्युदंड के खिलाफ लिखना भी शामिल है.

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