ट्रंप का NATO पर फूटा गुस्सा: 'जब हमें जरूरत थी तब साथ नहीं थे, अब हम क्यों खड़े रहें?'

Trump Slams NATO: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (NATO) देशों को खरी-खरी सुनाते हुए साफ कर दिया है कि अगर वे मुश्किल वक्त में अमेरिका का साथ नहीं दे सकते, तो अमेरिका भी उनकी सुरक्षा के लिए बाध्य नहीं है. फ्लोरिडा में आयोजित 'फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव प्रायोरिटी समिट' में बोलते हुए ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध में नाटो की भूमिका पर गहरी नाराजगी जताई.

Trump Slams NATO: ट्रंप ने कहा कि ईरान संघर्ष के दौरान नाटो का रिस्पॉन्स न देना एक भयानक गलती थी. उनके अनुसार, जब अमेरिका दुनिया की भलाई के लिए ईरान से लोहा ले रहा था, तब नाटो देशों ने मामूली सैन्य मदद तक नहीं भेजी. ट्रंप ने दो-टूक कहा कि युद्ध हमेशा जोखिम भरा होता है, लेकिन उन्हें अपनी सेना पर पूरा भरोसा था क्योंकि वह दुनिया में सबसे ताकतवर है. उन्होंने जोर देकर कहा कि नाटो का वहां मौजूद न होना भविष्य के लिए बड़े संकेत देता है.

सुरक्षा के बदले अरबों डॉलर का बोझ

ट्रंप ने अमेरिका पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का जिक्र करते हुए कहा कि वाशिंगटन हर साल नाटो देशों की सुरक्षा पर सैकड़ों अरब डॉलर खर्च करता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब अमेरिका को जरूरत थी, तब ये देश साथ नहीं थे, तो अब अमेरिका को उनके लिए खड़ा रहने की क्या जरूरत है? ट्रंप के मुताबिक, ‘वे हमारे लिए वहां नहीं थे, तो हम उनके लिए क्यों रहें?’

ब्रिटिश जहाजों को बताया ‘खिलौना’

इससे पहले गुरुवार को एक कैबिनेट मीटिंग में ट्रंप ने नाटो की आलोचना करते हुए इसे एक टेस्ट बताया था, जिसमें गठबंधन फेल रहा. उन्होंने कहा कि अमेरिका अकेले युद्ध का पूरा बोझ उठा रहा है. इस दौरान उन्होंने ब्रिटेन पर भी तंज कसा और कहा कि वे नहीं चाहते कि अमेरिका किसी ब्रिटिश युद्ध में घसीटा जाए. उन्होंने ब्रिटेन के विमानवाहक पोतों की तुलना अमेरिका के सामने खिलौनों से कर दी.

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव

इन्वेस्टमेंट फोरम के दौरान ट्रंप ने इस बात पर गुस्सा जाहिर किया कि नाटो देशों ने ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को सुरक्षित करने में कोई मदद नहीं की. यह समुद्री रास्ता ग्लोबल तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद जरूरी है. एएनआई के अनुसार, ट्रंप ने मजाक में इसे ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ भी कह दिया और बाद में कहा कि उनके मुंह से निकला हर शब्द सोच-समझकर होता है.

पुराने विवादों ने बढ़ाई कड़वाहट

ट्रंप और नाटो के बीच रिश्ते पहले से ही उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं. 2025 में कुछ यूरोपीय नेताओं के साथ उनके संबंध सुधरे थे, लेकिन 2026 की शुरुआत में जब ट्रंप ने डेनमार्क के इलाके ‘ग्रीनलैंड’ को अमेरिका में मिलाने या वहां सैन्य कार्रवाई की बात कही, तो रिश्तों में फिर से खटास आ गई. द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी थी कि किसी भी नाटो सहयोगी पर अमेरिकी हमला गठबंधन का अंत होगा.

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ईरान युद्ध के एक महीने का हिसाब

ईरान और इजरायल के बीच चल रहे इस युद्ध को एक महीना बीत चुका है. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने इस ऑपरेशन के 5 मुख्य लक्ष्य रखे हैं, जिन्हें वे जल्द पूरा कर युद्ध खत्म करना चाहते हैं. फिलहाल ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की अपनी चेतावनी को 6 अप्रैल 2026 तक के लिए टाल दिया है, क्योंकि उनके अनुसार बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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