भारत-चीन सीमा पर करीब 6 साल के लंबे अंतराल के बाद हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले स्थित शिपकी ला दर्रे से व्यापार एक बार फिर शुरू हो गया. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, शनिवार ( 1 अगस्त ) को 16 भारतीय व्यापारी तिब्बत के लिए रवाना हुए. इस मौके पर हिमाचल प्रदेश के मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि यह सिर्फ व्यापार की बहाली नहीं, बल्कि किन्नौर और तिब्बत के बीच सदियों पुराने आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्तों को फिर से मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है.
कभी खुला था पूरा रास्ता, फिर बढ़ती गई पाबंदियां
मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि पहले किन्नौर के व्यापारी बिना ज्यादा रोक-टोक तिब्बत के अंदर तक जाकर व्यापार करते थे. लेकिन तिब्बत पर चीन का प्रशासन मजबूत होने के बाद सीमाई व्यापार पर कई तरह की पाबंदियां लग गईं. समय के साथ व्यापार सीमित होता गया और आखिरकार छह साल पहले पूरी तरह बंद हो गया था. अब दोनों देशों की सहमति के बाद इसे फिर से शुरू किया गया है.
भारत-चीन संबंधों में साल 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद भारी तनाव आ गया था. इसके बाद सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ी और दोनों देशों के बीच कई स्तरों पर बातचीत चली. ऐसे माहौल में शिपकी ला से व्यापार दोबारा शुरू होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सीमाई इलाकों में सामान्य गतिविधियों को धीरे-धीरे बहाल करने की कोशिश की जा रही है.
सीमावर्ती लोगों को मिलेगी नई उम्मीद
शिपकी ला के खुलने से किन्नौर के व्यापारियों, बागवानों और स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है. यह मार्ग लंबे समय से स्थानीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता रहा है. व्यापार की बहाली से न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारत-चीन सीमा पर रहने वाले लोगों के बीच पारंपरिक कारोबारी संबंधों को भी नई गति मिलने की संभावना है.
ये भी पढ़ें: ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले-जब वे कहेंगे कि अब हम और नहीं झेल सकते
