Nepal Flood : सीनियर क्लाइमेट ऑफिसर ने कहा कि तिब्बती पठार पर मौजूद हिमनद और अस्थिर हो सकता है. इससे तिब्बत-नेपाल सीमा पर हाल में आई अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं फिर सामने आ सकती हैं. नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन होने के कारण आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई, जिससे सैकड़ों लोगों की मौत हो गई.
चीन सरकार की आधिकारिक संस्था, 'राष्ट्रीय जलवायु केंद्र' के डिप्टी डायरेक्टर गाओ रोंग ने कहा, ‘‘पिछले 60 साल में तिब्बती पठार पर हिमनद क्षेत्र लगभग 24 प्रतिशत सिकुड़ गया है और करीब 7,000 छोटे हिमनद पूरी तरह खत्म हो गए हैं.’’
हांगकांग के 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' के अनुसार, गाओ रोंग ने कहा कि आने वाले समय में तिब्बती पठार के हिमनद और कमजोर हो सकते हैं. इससे अचानक बाढ़ और हिमनद से जुड़ी दूसरी आपदाओं का खतरा बढ़ेगा. इन आपदाओं का असर एक साथ कई इलाकों में पड़ सकता है. इससे तबाही का दायरा भी पहले के मुकाबले बढ़ने की आशंका है.
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नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई
बुधवार (2 सितंबर) को चीनी अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, नेपाल सीमा से सटे तिब्बत के ग्यारोंग पोर्ट पर पिछले हफ्ते आई अचानक बाढ़ में 21 लोगों की मौत हो गई और 541 लोग लापता हो गए. सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने तिब्बत के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि 30 अगस्त को जारी आंकड़ों के अनुसार, लापता लोगों में 261 विदेशी शामिल हैं, जिनमें भारत और 22 अन्य देशों के 49 लोग भी हैं. नेपाल में, प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या गुरुवार (3 अगस्त) को बढ़कर 1,252 हो गई.
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हिमनद के टूटने से बने मलबे का बहाव घाटी में 22 किलोमीटर तक गया
एक और सरकारी संस्था, 'चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज' के 'इंस्टिट्यूट ऑफ तिब्बतन प्लेटू रिसर्च' ने हालिया आपदा पर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हिमनद के टूटने से बने मलबे का बहाव घाटी में 22 किलोमीटर तक गया और सिर्फ सात मिनट में तिब्बत सीमा पर स्थित 'ग्यिरोंग पोर्ट' तक पहुंच गया. बुधवार (2 सितंबर) को 'नेचर' पत्रिका में छपे एक लेख में निगरानी और पूर्वानुमान सिस्टम को अपडेट करने की अर्जेंट रिक्वायरमेंट पर जोर दिया गया.
