भारत से शेख हसीना का आरोप: यूनुस को बताया खूनी तानाशाह और सूदखोर, बोलीं बांग्लादेश डर के दौर में

भारत से दिए गए संदेश में पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मोहम्मद यूनुस की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने मौजूदा हालात को लोकतंत्र और सुरक्षा के लिए खतरा बताया, हिंसा रोकने, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की. बयान ऐसे समय आया है जब देश में चुनाव नजदीक हैं.

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2024 में सत्ता से हटाए जाने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से बड़ा बयान दिया है. भारत आने के बाद उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस पर सीधा हमला बोला और उन पर अवैध और खूनी तानाशाह चलाने का आरोप लगाया.

23 जनवरी 2026 को शेख हसीना ने दिल्ली के फॉरेन करेस्पॉन्डेंट्स क्लब में ऑडियो संदेश के जरिए यह बयान दिया. उनके अनुसार, मौजूदा बांग्लादेश डर, अराजकता और लोकतंत्र के खत्म होने के दौर से गुजर रहा है.

‘बांग्लादेश एक खुली जेल बन चुका है’

हसीना बोलीं- मेरी सरकार हटाना सोची-समझी साजिश थी. शेख हसीना ने कहा कि 5 अगस्त 2024 को उन्हें सत्ता से हटाया जाना कोई सामान्य राजनीतिक बदलाव नहीं था, बल्कि यह एक पूरी तरह से योजनाबद्ध साजिश थी. उनके अनुसार, इसके बाद बांग्लादेश एक बड़ी जेल, मौत की घाटी और डर के माहौल में बदल गया है.

हसीना ने मोहम्मद यूनुस को खूनी तानाशाह, सूदखोर, मनी लॉन्ड्रर और सत्ता के भूखे देशद्रोही जैसे शब्दों से संबोधित किया. उन्होंने आरोप लगाया कि यूनुस देश को विदेशी ताकतों के हाथों गिरवी रख रहे हैं.

‘विदेशी ताकतों के इशारे पर चल रही सरकार’

हसीना के मुताबिक, मौजूदा सरकार देश के संसाधन और जमीन विदेशी हितों के बदले सौंप रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय टकराव की ओर धकेला जा रहा है. उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे विदेशी ताकतों की मदद से चल रही कठपुतली सरकार” को हटाने के लिए एकजुट हों और संविधान को फिर से बहाल करें.

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देश को ‘ठीक’ करने के लिए हसीना की 5 मांगें

शेख हसीना ने बांग्लादेश को सामान्य स्थिति में लाने के लिए पांच अहम मांगें रखीं. जिसमें शामिल हैं-

पहली मांग: उन्होंने अवैध यूनुस प्रशासन को हटाने की मांग की. उनका कहना था कि जब तक मौजूदा सत्ता बनी रहेगी, तब तक बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं.

दूसरी मांग: देश में रोज हो रही हिंसा, सड़क संघर्ष और अराजकता को खत्म किया जाए ताकि अर्थव्यवस्था दोबारा खड़ी हो सके.

तीसरी मांग: धार्मिक माइनॉरिटी, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए पक्की गारंटी दी जाए.

चौथी मांग: पत्रकारों और अवामी लीग नेताओं को दबाने के लिए कानून के गलत इस्तेमाल को रोका जाए और निष्पक्ष न्याय व्यवस्था बहाल की जाए.

पांचवीं मांग: संयुक्त राष्ट्र से पिछले एक साल की घटनाओं की “नई और निष्पक्ष जांच” कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके.

अवामी लीग को बताया देश की रीढ़

हसीना ने अवामी लीग को बांग्लादेश की स्वतंत्रता और पहचान का रक्षक बताया. उन्होंने कहा कि मुक्ति संग्राम की सोच को मानने वाली सभी ताकतों को एक साथ आना होगा. उन्होंने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय आपके साथ खड़ा है और अवामी लीग फिर से देश को स्थिर और मजबूत बनाने में भूमिका निभाएगी.

चुनाव से पहले सख्त संदेश

शेख हसीना का यह करीब एक घंटे का संबोधन दिल्ली में मौजूद श्रोताओं और ऑनलाइन करीब एक लाख लोगों ने सुना. भाषण के अंत में उन्होंने पारंपरिक नारे जय बांग्ला और जय बंगबंधु लगाए. यह बयान ऐसे समय आया है, जब बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में हसीना का यह भाषण आने वाले दिनों में देश की राजनीति को और गरम कर सकता है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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