एक दो नहीं सात रूसी तेल जहाजों का यू-टर्न, चीन का रास्ता छोड़ भारत की ओर मुड़े

Russian Oil Tanker India: ईरान युद्ध के कारण पूरे विश्व में ऊर्जा संकट पैदा हो गया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हुआ, तो तेल की सप्लाई में और मुश्किलें आईं. तेल संकट की मुश्किलें इस वजह से भी थीं, क्योंकि रूस के तेल पर अमेरिकी की ओर से सैंक्शन लगा हुआ था. लेकिन जैसे ही यूएस प्रशासन ने इसमें 11 मार्च को एक महीने की छूट दी, रूसी तेल की मांग भी बढ़ी और दाम भी बढ़े. हालांकि, तेल खरीद का ट्विस्ट तो और गजब का है, क्योंकि रूसी तेल लदे 7 टैंकर चीन जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने टर्न लेकर भारत का रुख कर लिया.

Russian Oil Tanker India: रूस का तेल लेकर चीन जा रहा एक टैंकर दक्षिण चीन सागर में अचानक अपना रास्ता बदलकर अब भारत की ओर बढ़ रहा है. यह कदम अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच उठाया गया है. शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, अफ्रामैक्स टैंकर एक्वा टाइटन (Aqua Titan) 21 मार्च को न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचने वाला है, जिसमें रूस का यूराल्स क्रूड तेल लदा हुआ है. वहीं, ऊर्जा विश्लेषण कंपनी वोर्टेक्सा लिमिटेड के मुताबिक, अब तक कम से कम 7 टैंकर ऐसे हैं, जिन्होंने यात्रा के बीच में अपना गंतव्य चीन से बदलकर भारत कर लिया है. भारत की लगभग सभी बड़ी रिफाइनरियां अब रूसी तेल खरीदने में जुटी हैं.

Aqua Titan जहाज ने जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से तेल लोड किया था और शुरुआत में चीन के रिझाओ पोर्ट को अपना गंतव्य बताया था. हालांकि, मार्च के मध्य में यह टैंकर दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री क्षेत्र में अचानक मुड़ गया और भारत की ओर बढ़ने लगा. 

इसके साथ ही सूएज मैक्स श्रेणी का जहाज जूजू एन (Zouzou N), जो कजाखस्तान का सीपीसी ब्लेंड कच्चा तेल ले जा रहा है, अब यह भी भारत के पश्चिमी तट पर स्थित सिक्का बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है और 25 मार्च तक पहुंचने की उम्मीद है. 

यह जहाज पहले रूस के ब्लैक सी स्थित नोवोरोसिस्क से रवाना हुआ था और शुरू में चीन के रिझाओ के पास जाने वाला था, लेकिन मार्च की शुरुआत में इसने भी रास्ता बदलकर भारत की ओर रुख कर लिया.

अमेरिका की छूट के बाद बढ़ा भारत का रूसी तेल इंपोर्ट

यह बदलाव ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका ने भारत को रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने की अनुमति दी, ताकि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने से पैदा हुए ऊर्जा संकट का मुकाबला किया जा सके. इस छूट के बाद भारतीय रिफाइनर तेजी से सक्रिय हुए और एक हफ्ते के भीतर करीब 3 करोड़ बैरल रूसी तेल की खरीद कर ली. 

इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद मार्च में लगभग 50% तक बढ़ गई है. जहाज-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, आयात फरवरी के 10.4 लाख बैरल प्रति दिन से बढ़कर करीब 15 लाख बैरल प्रति दिन हो गया है.

यह बढ़ोतरी मिडिल ईस्ट से कम हो रही सप्लाई की भरपाई के लिए की जा रही है. दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 88% आयात के जरिए पूरा करता है. इसमें बड़ा हिस्सा आमतौर पर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है. दुनिया की 20% से अधिक तेल और एलएनजी सप्लाई भी इसी रूट से होती है. लेकिन ईरान युद्ध की वजह से यह रास्ता फिलहाल सुरक्षित नहीं है. 

ये भी पढ़ें:- कौन है NIA की गिरफ्त में आया मैथ्यू वैनडाइक? लीबिया, सीरिया, यूक्रेन में लड़ा अमेरिकी, अब भारत के लिए खतरा!

ये भी पढ़ें:- बहुत जल्द वह पद से हटने वाले हैं… ईरान युद्ध के बीच फ्रांस के प्रेसिडेंट पर क्यों भड़के ट्रंप?

भारत सरकार ने इस पर कोई सूचना से किया इनकार

हालांकि, भारत के पास चीन से यूटर्न लेकर आने वाले इन रूसी तेल टैंकरों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने एक अंतर-मंत्रालयी बैठक के दौरान कहा कि अधिकारियों को ऐसे किसी जहाज के भारत की ओर आने की जानकारी नहीं है. वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इस घटनाक्रम की पुष्टि नहीं की.

रूसी तेल की बढ़ी हुई आपूर्ति मिडिल ईस्ट से कम हुई आपूर्ति के असर को कुछ हद तक संतुलित कर रही है, हालांकि एलपीजी को लेकर जोखिम अभी भी बना हुआ है. भारत अपनी रसोई गैस की अधिकांश जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिसका बड़ा हिस्सा होरमुज जलडमरूमध्य से होकर आता है, जिससे आपूर्ति लंबे समय तक बाधित होने का खतरा बना रहता है.

ये भी पढ़ें:- लेबनान की 22 मंजिला इमारत, इजरायल ने 11 सेकेंड में ढहाई, धुएं के गुबार के बीच तबाही का Video

ये भी पढ़ें:- छुट्टियों में बेइंतहा प्यार करो… चाइनीज यूनिवर्सिटी की छात्रों से अपील, पॉपुलेशन बढ़ाने को बेकरार चीन

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति

हालांकि, तनावपूर्ण हालात के बावजूद कुछ भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस होर्मुज से गुजरने में सफल रहे हैं. मंगलवार को भारतीय ध्वज वाला एलपीजी कैरियर नंदा देवी गुजरात के जामनगर जिले के वाडीनार बंदरगाह पहुंचा, जिसमें 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी लदा हुआ था, जिसे एंकरज पर जहाज से जहाज ट्रांसफर किया जाना है. 

इससे पहले एक अन्य भारतीय एलपीजी कैरियर शिवालिक के साथ होरमुज जलडमरूमध्य पार कर चुका था. सरकार के अनुसार, दोनों जहाजों ने सप्ताहांत के दौरान इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को सुरक्षित रूप से पार किया. 

जहां शिवालिक सोमवार को भारत पहुंच गया, वहीं नंदा देवी मंगलवार को वाडीनार में लंगर डाला. वहीं, भारत का एक और जहाज जग लाडकी भी गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर आज बुधवार को पहुंचा. 

इन तीनों जहाजों का सुरक्षित पहुंचाने के लिए भारतीय नेवी अरब सागर में पूरी मुस्तैदी से तैनात है. देश के ऊर्जा आयात के लिए बेहद अहम क्षेत्र में भारत की चुस्त तैनाती और कूटनीति का ही सफल परिणाम है कि आने वाले समय में ऊर्जा संकट समाप्त हो सकेगा. 

ये भी पढ़ें:- मिडिल ईस्ट में तैनात हैं 200 से ज्यादा यूक्रेन के मिलिट्री एक्सपर्ट, जेलेंस्की ने बताया घर की लड़ाई छोड़ यहां क्या कर रहे?

ये भी पढ़ें:- बेटे के साथ मारे गए ईरानी सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी, युद्ध के बीच ईरान के लिए कितना बड़ा झटका?

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >