Iran War Saudi Arabia Meeting: ईरान युद्ध की वजह से खाड़ी देशों में सुरक्षा संकट पैदा हो गया है. जहां अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के ऊपर बम और मिसाइल बरसा रहे हैं, वहीं ईरान अपना बदला मिडिल ईस्ट में यूएस बेस और उसके हितों को निशाना बनाते हुए पूरा कर रहा है. इसमें सबसे ज्यादा मार यूएई और सऊदी को झेलनी पड़ी है. अब इसके समाधान के लिए सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि वह बुधवार शाम राजधानी रियाद में ‘अरब और इस्लामी देशों के एक समूह के विदेश मंत्रियों’ की एक उच्च स्तरीय बैठक की मेजबानी करेगा.
यह उच्च स्तरीय बैठक मंगलवार को हुई गहन कूटनीतिक गतिविधियों के बाद आयोजित की जा रही है. सऊदी विदेश मंत्रालय द्वारा सोशल मीडिया एक्स पर किए गए एक पोस्ट के अनुसार, इस परामर्श सत्र का मुख्य फोकस ‘क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को समर्थन देने के तरीकों पर विचार-विमर्श और समन्वय’ होगा. ये अहम चर्चाएं ऐसे समय में हो रही हैं जब पूरे मध्य पूर्व में तेजी से तनाव और संघर्ष बढ़ रहा है.
सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, इराक, सीरिया, अल्जीरिया और बोस्निया एवं हर्जेगोविना के अपने समकक्षों के साथ फोन पर कई दौर की बातचीत की, ताकि इस बैठक की रूपरेखा तैयार की जा सके. अंततः, बुधवार की यह बैठक अरब और इस्लामी देशों द्वारा मौजूदा संघर्ष के प्रभावों को संभालने के लिए एकजुट प्रयास का संकेत देती है. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य तनाव को कम करने (डी-एस्केलेशन) के लिए एक रूपरेखा तैयार करना और क्षेत्रीय संकट को और बिगड़ने से रोकना है.
मिडिल ईस्ट में क्षेत्रीय स्थिति 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान के बाद और बिगड़ गई, जिसके जवाब में तेहरान ने कई दौर के ड्रोन और मिसाइल हमले किए. सऊदी अरब में बैठक का यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच व्यापक टकराव अपने 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है.
खाड़ी देशों, इजराइल और अमेरिका के सैन्य बेस और दूतावास पर हुए हमलों की वजह से मिडिल ईस्ट पिछले कई वर्षों की सबसे बड़ी सुरक्षा आपात स्थिति का सामना कर रहा है. इस बढ़ती हिंसा का असर प्रमुख लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्रों पर भी साफ दिखाई दे रहा है.
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दुबई और दोहा के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को कई बार बंद करना पड़ा है, जिससे वैश्विक व्यापार, यात्री आवागमन और जरूरी चिकित्सा आपूर्ति की डिलीवरी पर गंभीर असर पड़ा है. वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से दुनिया भर के तेल बाजार पर भी काफी असर पड़ा है. तेल के दाम 100 डॉलर के पार पहुंच गए हैं. अमेरिका ने पिछले दिनों अरब देशों से सुरक्षा व्यवस्था को अपने हाथ में लेने की अपील की थी.
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भले ही ईरान ने खाड़ी के अरब देशों के ऊपर हमले किए, लेकिन इन देशों ने जवाबी हमला नहीं किया. लेकिन ईरान में कमजोर होती लीडरशिप के बाद अब परिस्थिति बदलती जा रही है. यह कहा नहीं जा सकता कि ये देश ईरान पर कोई साझा अटैक करेंगे या नहीं. लेकिन इस बैठक के आउटकम पर सबकी नजर रहेगी.
