रूस-यूक्रेन जंग के 5वें साल में UN का बड़ा प्रस्ताव, भारत ने क्यों बनाई दूरी? जानें वजह

Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन जंग के 5वें साल में प्रवेश करते ही UN में बड़ा घटनाक्रम हुआ. यूक्रेन ने शांति और युद्धविराम का प्रस्ताव रखा, जिस पर दुनिया के देशों की राय बंट गई. 107 देशों ने समर्थन दिया, लेकिन भारत सहित 51 देशों ने वोटिंग से दूरी बनाकर सबको चौंका दिया.

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुकी है. इस मौके पर मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक महत्वपूर्ण ड्राफ्ट प्रस्ताव पेश किया गया. इस प्रस्ताव का नाम ‘सपोर्ट फॉर लास्टिंग पीस इन यूक्रेन’ रखा गया था. इसका मुख्य मकसद यूक्रेन में तुरंत और बिना किसी शर्त के युद्धविराम (सीजफायर) लागू करना था.

वोटिंग का गणित: कौन साथ, कौन अलग?

193 सदस्यों वाली महासभा में इस प्रस्ताव पर वोटिंग हुई. नतीजा कुछ इस तरह रहा:

  • समर्थन में: 107 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया.
  • विरोध में: 12 देशों ने इस प्रस्ताव को नकार दिया.
  • दूरी बनाई: भारत सहित 51 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.
  • खास बात यह है कि भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और यहाँ तक कि अमेरिका जैसे देशों ने भी इस बार वोटिंग से दूरी बनाए रखी.

भारत ने पहली बार ऐसा नहीं किया है. रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से UN में जितने भी प्रस्ताव रूस के खिलाफ आए हैं, भारत लगभग उन सभी में वोटिंग से बाहर ही रहा है.

इसके पीछे की बड़ी वजहें:

  • पुराना दोस्त: रूस भारत का पुराना और भरोसेमंद डिफेंस पार्टनर है.
  • कूटनीति (डिप्लोमेसी): भारत का मानना है कि युद्ध का हल वोटिंग से नहीं, बल्कि बातचीत और डिप्लोमेसी से निकलना चाहिए.
  • बैलेंसिंग एक्ट: भारत न तो अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी देशों के दबाव में आता है और न ही रूस का खुलकर समर्थन करता है. पीएम मोदी ने पहले भी कहा है कि यह युद्ध का युग नहीं है, लेकिन भारत सीधे तौर पर रूस की निंदा करने वाले प्रस्तावों से बचता रहा है.

प्रस्ताव में क्या-क्या मांगें रखी गईं?

यूक्रेन (कीव) द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला देते हुए कई बड़ी बातें कही गईं:

  • कैदियों की अदला-बदली: सभी युद्ध बंदियों को पूरी तरह रिहा किया जाए.
  • नागरिकों की वापसी: जबरन भेजे गए लोगों और बच्चों को वापस लाया जाए.
  • संप्रभुता का सम्मान: यूक्रेन की सीमाओं और उसकी जमीन की अखंडता को बनाए रखा जाए.
  • हमलों पर चिंता: रूस द्वारा नागरिकों और बिजली जैसे जरूरी बुनियादी ढांचों पर किए जा रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई गई.

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राष्ट्रपति जेलेंस्की ने जताया आभार

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने प्रस्ताव का समर्थन करने वाले 107 देशों को ‘थैंक यू’ कहा. उन्होंने एक्स पर लिखा कि यह शांति की दिशा में सही कदम है और वे अपने लोगों की वापसी और न्याय के लिए पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करते रहेंगे.

जंग का पांचवां साल है

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि 24 फरवरी को रूस के हमले के चार साल पूरे हो गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. गुटेरेस के अनुसार, साल 2025 में सबसे ज्यादा आम नागरिक मारे गए हैं, जो बेहद दुखद है. उन्होंने इसे वैश्विक शांति के लिए खतरा बताते हुए तुरंत युद्ध रोकने की अपील की.

भले ही मैदान पर गोलियां चल रही हों, लेकिन राहत की बात यह है कि दोनों पक्ष अमेरिका के साथ एक त्रिपक्षीय (ट्राईलेटरल) बैठक में शामिल हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ही पक्ष आगे की बातचीत को लेकर सकारात्मक (पॉजिटिव) नजर आ रहे हैं. हालांकि, जमीनी हकीकत अब भी गंभीर है और शांति की तलाश जारी है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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