जर्मनी में मिली 1600 साल पुरानी रोमन नहर: खेतों के नीचे दबी थी सम्राट की 'सुपरहाइवे' वाली सीक्रेट तकनीक

Roman Secret Canal: जर्मनी के ग्रॉस-गेराउ में मिली 1600 साल पुरानी नहर ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. 'लैंड' जर्नल के मुताबिक, सम्राट वैलेंटिनियन प्रथम की यह सीक्रेट वॉटर-इंजीनियरिंग रोमन साम्राज्य के पतन के बाद भी सदियों तक इस्तेमाल होती रही.

Roman Secret Canal: जर्मनी के ग्रॉस-गेराउ इलाके में पुरातत्वविदों को एक विशाल नहर मिली है, जो करीब 1600 साल पुरानी है. ‘लैंड’ जर्नल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, यह नहर खेतों के नीचे दबी हुई थी जिसे रिमोट सेंसिंग तकनीक की मदद से खोजा गया है. इस नहर को चौथी शताब्दी में रोमन सम्राट वैलेंटिनियन प्रथम  के शासनकाल के दौरान बनाया गया था.

सेना के लिए बनाया गया था 15 मीटर चौड़ा रास्ता

इस नहर की चौड़ाई 15 मीटर और गहराई 2.5 मीटर है. इसे खास तौर पर रोमन सेना की रसद और सामान को तेजी से पहुंचाने के लिए तैयार किया गया था. यह राइन नदी (Rhine River) और ट्रेबर-एस्थाइम के सैन्य ठिकाने को आपस में जोड़ती थी. उस समय राइन नदी के घुमावदार रास्तों से बचने और सुरक्षा के लिहाज से इसे एक ‘सुपरहाइवे’ की तरह इस्तेमाल किया जाता था ताकि गश्ती नावें और भारी मालवाहक जहाज बिना रुके निकल सकें.

इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना

मिट्टी की जांच और सैंपलिंग से पता चला है कि यह कोई प्राकृतिक नाला नहीं बल्कि रोमन इंजीनियरिंग का मास्टरपीस है. इसे जानबूझकर नीचे से सपाट और किनारों से ढलान वाला बनाया गया था, ताकि भारी जहाजों से उठने वाली लहरों को संभाला जा सके. यह खोज दिखाती है कि उस दौर में रोमन साम्राज्य ने सीमाओं की सुरक्षा के लिए कुदरती रास्तों को भी अपने हिसाब से बदल दिया था.

रोमन साम्राज्य खत्म होने के बाद भी होता रहा इस्तेमाल

जर्नल ‘लैंड’ की रिपोर्ट में रेडियोकार्बन डेटिंग का हवाला देते हुए बताया गया है कि रोमन प्रशासन के जाने के बाद भी यह नहर बेकार नहीं हुई थी. इसे 7वीं और 8वीं शताब्दी तक लगातार साफ और मेंटेन रखा गया. मेरोविंगियन और कैरोलिंगियन राजवंशों के समय में भी इसका इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट के लिए होता रहा. यह खोज रोमन सेना की रणनीति और उनकी खुदाई तकनीक को समझने का नजरिया पूरी तरह बदल देगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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