(ग्राउंड जीरो से : मनोज गुप्ता की रिपोर्ट) Nepal Flood : नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी है. किसी ने अपनों को खो दिया, तो किसी का घर-बार तबाह हो गया. इसी त्रासदी के बीच रसुवा की रहने वाली रंजीना तामांग की कहानी दिल दहला देने वाली है. उन्होंने 26 अगस्त को अपनी जान की परवाह किए बिना बाढ़ के बीच संघर्ष करते हुए 7 साल और 4 महीने की उम्र के बच्चों समेत चार बच्चों की जान बचाई, लेकिन इस जद्दोजहद में वह अपने ससुर और चाचा को नहीं बचा सकीं. बाढ़ उन्हें कहां बहाकर ले गई, इसका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है.
रंजीना के लिए त्रासदी यहीं खत्म नहीं हुई. उनके मायके के पांच लोगों में अब सिर्फ एक व्यक्ति के जीवित बचने की खबर है. रसुवा के नौबिसे में स्थित उनका आधा घर बाढ़ की चपेट में आकर ढह चुका है. उन्हें यह खबर मिली है कि घर के अंदर और बाहर बाढ़ से बहकर आए शव बिखरे पड़े हैं. दूसरी ओर, उनकी सास का रो-रोकर बुरा हाल है. आंखों के आंसू जैसे थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं.
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Nepal Flood Victims: एक स्कूल में शरण ले रखी है रंजीना ने
बाढ़ के बाद रंजीना ने एक स्कूल में शरण ले रखी है. राहत के तौर पर उन्हें मैट और चादर मिली है. सुबह-शाम दो बच्चों और खुद के लिए भोजन मिल जाता है. खाने के साथ कभी बिस्कुट तो कभी फ्रूटी भी मिल जाती है, लेकिन उनके पास पहनने तक के पर्याप्त कपड़े नहीं हैं. वें खुद दमा की मरीज हैं. बाढ़ ने घर और परिवार ही नहीं छीना, बल्कि उनकी बीमारी से लड़ने की क्षमता भी छीन ली है. दमा की दवा खरीदने तक के पैसे उनके पास नहीं हैं.
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Nepal Flood News: स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने रंजीना का स्वास्थ्य परीक्षण किया
बीते शनिवार (29 अगस्त) को स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया था. स्वास्थ्यकर्मियों ने दवा उपलब्ध कराने के लिए उनका नाम भी नोट किया और दवा लाकर देने का भरोसा दिया, लेकिन उनके हाथों में दवा नहीं पहुंची है. एक तरफ घर के अंदर-बाहर बिखरे शवों की खबर, दूसरी तरफ लापता ससुर और चाचा की चिंता और ऊपर से बच्चों की जिम्मेदारी, रंजीना की जिंदगी इस समय दर्द और बेबसी के बीच गुजर रही है. नेपाल की इस त्रासदी के बीच रंजीना की कहानी सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों लोगों की पीड़ा की तस्वीर है, जिन्होंने बाढ़ में अपना घर, अपना परिवार और अपनी जिंदगी की जमा-पूंजी तक खो दी है.
