पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. पिछले दो महीनों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में लोग महंगाई, बिजली संकट, आटे की कमी और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं. JAAC का कहना है कि हक मांगने वाले लोगों पर गोलियां चलाई जा रहीं हैं. PoK में मौजूदा चुनावी माहौल के बीच यह आंदोलन पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
मस्जिदों से हो रही लोगों से एकजुट होने की अपील
मुजफ्फराबाद सहित कई इलाकों में मस्जिदों के लाउडस्पीकरों से लोगों से एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की जा रही है. जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कहा कि 1990 के दशक में पाकिस्तान की ओर से ऐसे ही लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए किया जाता था. उनके मुताबिक, अब वही तरीका पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल हो रहा है और हालात उसके लिए मुश्किल बनते जा रहे हैं.
PoK में बढ़ता जनाक्रोश पाकिस्तान के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है. लगातार विरोध प्रदर्शनों ने इस क्षेत्र में पाकिस्तान की पकड़ कमजोर होने का संकेत दिया है.
15 से 35 साल के युवाओं पर सबसे ज्यादा असर
रावलाकोट में अस्थायी क्लिनिक चला रहे एक डॉक्टर ने बताया कि गोली लगने वाले अधिकांश लोग 15-16 साल से लेकर 32-35 साल की उम्र के हैं. उन्होंने कहा कि उनके पास प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है, लेकिन सीने, सिर और पेट में गंभीर चोट वाले मरीजों को बड़े अस्पतालों की जरूरत पड़ती है. एक साथ बड़ी संख्या में घायल आने पर अस्पतालों के लिए भी स्थिति संभालना मुश्किल हो सकता है.
परिजनों का दर्द- 'हमने सिर्फ अपने अधिकार मांगे थे'
प्रदर्शनकारियों और मृतकों के परिवारों का कहना है कि वे सिर्फ सस्ती बिजली, आटा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे थे. एक युवक ने कहा कि "हमने केवल अपने अधिकार मांगे थे, लेकिन हमें गोलियां मिलीं." वहीं, अपने बेटे को खो चुकी एक मां ने कहा कि उनका बेटा आतंकवादी नहीं था, बल्कि न्याय की लड़ाई लड़ रहा था। कई परिवारों ने अपने जवान बेटों को खोने का दर्द साझा किया और कार्रवाई को अन्याय बताया.
सरकार और प्रदर्शनकारियों के दावे आमने-सामने
JAAC का आरोप है कि पाकिस्तान और PoK सरकार ने अक्टूबर 2025 में हुए समझौते को लागू नहीं किया, जिसके कारण लोगों का गुस्सा बढ़ा. दूसरी ओर स्थानीय प्रशासन का कहना है कि संगठन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है और उसके कुछ सदस्य हथियारबंद हैं. पाक सरकार का आरोप है कि आंदोलन का मकसद चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे अपने अधिकारों की लड़ाई बता रहे हैं.
PoK में बढ़ता जनाक्रोश पाकिस्तान के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। उनका कहना है कि लगातार विरोध प्रदर्शनों ने इस क्षेत्र में पाकिस्तान की पकड़ कमजोर होने का संकेत दिया है।
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