नेपाल में फिर गरमाया ‘हिंदू राष्ट्र’ का मुद्दा, सुनसरी हिंसा के बाद पहाड़ से मधेश तक हलचल

नेपाल में करीब 18 साल बाद हिंदू राष्ट्र का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है. सुनसरी जिले में धार्मिक हिंसा के बाद तनाव बढ़ा है, जिससे यह मांग जोर पकड़ रही है. जानिए इस मुद्दे से जुड़ी पूरी जानकारी.

नेपाल में करीब 18 साल बाद हिंदू राष्ट्र का मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है. सुनसरी जिले के देवानगंज में धार्मिक विवाद के बाद हुई हिंसा ने इस मुद्दे को नई धार दे दी है. घटना के बाद नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में तनाव और विरोध की स्थिति बनी, वहीं हिंदू राष्ट्र समर्थक संगठन भी अपनी मांग को लेकर सक्रिय हुए हैं. ऐसे में नेपाल की संवैधानिक पहचान और हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर बहस तेज हो गई है.

देवानगंज में धार्मिक विवाद ने पकड़ा तूल

सुनसरी के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्टानगंज इलाके में 26 जुलाई की रात धार्मिक जुलूस के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर विवाद हुआ. इससे पहले इलाके में एक बिजली के खंभे पर लगे मुस्लिम समुदाय के झंडे को हटाकर हिंदू झंडा लगाए जाने की बात को लेकर भी तनाव बना था. विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों में पथराव शुरू हो गया और स्थिति हिंसक हो गई. हालात नियंत्रित करने पहुंची पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें एक युवक की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए.

हिंसा के बाद कई इलाकों में बढ़ी बेचैनी

सुनसरी की घटना का असर दूसरे इलाकों में भी दिखाई दिया. मधेश प्रदेश के कुछ जिलों में विरोध-प्रदर्शन और तनाव की स्थिति बनी. हालात को काबू में रखने के लिए प्रशासन को सुरक्षा बढ़ाने के साथ कुछ जगहों पर कर्फ्यू जैसे कदम उठाने पड़े. जनकपुर में भी शांति और सामाजिक सद्भाव की अपील के साथ रैली निकाली गई. हिंसा के कारण स्थानीय स्तर पर बाजार और शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित होने की खबरें सामने आईं.

2008 में बदली थी नेपाल की संवैधानिक पहचान

नेपाल 2008 तक दुनिया का एकमात्र आधिकारिक हिंदू राष्ट्र था. राजशाही के अंत और गणतांत्रिक व्यवस्था लागू होने के बाद देश को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया गया. इसके बाद से ही नेपाल में एक वर्ग लगातार देश को दोबारा हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग करता रहा है. अब सुनसरी की घटना के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

आरपीपी लंबे समय से उठा रही है मांग

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी यानी आरपीपी नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने के साथ संवैधानिक राजशाही की बहाली की भी समर्थक रही है. मई 2026 में पार्टी की मुख्य सचेतक खुशबू ओली ने संविधान संशोधन की प्रक्रिया में सनातन हिंदू राष्ट्र और संवैधानिक राजशाही जैसे मुद्दों को शामिल करने की मांग की थी. इससे यह स्पष्ट होता है कि हिंदू राष्ट्र का मुद्दा नेपाल में केवल धार्मिक संगठनों तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीतिक एजेंडे का भी हिस्सा है.

हिंदू संगठनों ने भी सरकार के सामने रखे सुझाव

नेपाल में विश्व हिंदू परिषद और हिंदू स्वयंसेवक संघ समेत कई संगठन भी हिंदू राष्ट्र की मांग का समर्थन करते हैं. विश्व हिंदू परिषद नेपाल की मातृशक्ति विभाग की अध्यक्ष कृष्णा पांडे के अनुसार, मई 2026 में सरकार के सामने वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना समेत कई सुझाव रखे गए थे. इस मुद्दे पर काठमांडू में मंत्रालय स्तर पर बैठक होने की बात भी सामने आई थी.

संविधान बदलना आसान नहीं, चाहिए व्यापक सहमति

नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव करना होगा. इसके लिए संविधान संशोधन की प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी और संसद में आवश्यक समर्थन के साथ व्यापक राजनीतिक सहमति भी जरूरी होगी. मार्च 2026 के चुनाव में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 182 सीटें हासिल की थीं. हालांकि इतनी बड़ी चुनावी जीत के बावजूद हिंदू राष्ट्र की व्यवस्था बहाल करने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया और राजनीतिक सहमति अहम होगी.

सुनसरी हिंसा ने फिर तेज की पहचान की बहस

सुनसरी की घटना के बाद नेपाल में धार्मिक पहचान, सांप्रदायिक सद्भाव और देश की संवैधानिक व्यवस्था को लेकर बहस फिर तेज हो गई है. हिंदू राष्ट्र समर्थक इसे नेपाल की सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि मौजूदा संविधान नेपाल को धर्मनिरपेक्ष संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में परिभाषित करता है. ऐसे में आने वाले समय में हिंदू राष्ट्र की मांग नेपाल की राजनीति में कितना बड़ा मुद्दा बनती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा.

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By Lucky Kumari

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