अगर हम न होते, तो आप फ्रेंच बोल रहे होते…ट्रंप के बड़बोलेपन पर किंग चार्ल्स ने कसा तंज

King Charles vs Donald Trump: ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हल्के-फुल्के अंदाज में जोरदार तंज कसा है. किंग ने ट्रंप को मजाक-मजाक में इतिहास की याद दिला दी.

King Charles vs Donald Trump: पूरी बात को समझने के लिए ट्रंप के बयान को जानना जरूरी है. डोनाल्ड ट्रंप ने किंग चार्ल्स III के साथ बातचीत के दौरान कहा था- अगर अमेरिका न होता तो यूरोप के कई देश आज जर्मन भाषा बोल रहे होते. ट्रंप के इसी बड़बोलेपन का जवाब किंग चार्ल्स ने दिया. ट्रंप अपनी बात से उन युद्धों की ओर इशारा कर रहे थे, जिसमें यूरोप पर जर्मनी का कब्जा होने की संभावना थी. इसका असर ये होता कि ब्रिटेन भी जर्मन भाषा बोलने लगता.

हम न होते, तो आप फ्रेंच बोल रहे होते : किंग चार्ल्स

किंग चार्ल्स III ने एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सामने कहा- मिस्टर प्रेसिडेंट, आपने हाल ही में टिप्पणी की थी कि अगर संयुक्त राज्य अमेरिका न होता, तो यूरोपीय देश जर्मन बोल रहे होते. क्या मैं यह कहने की हिम्मत कर सकता हूं कि अगर हम न होते, तो आप आज फ्रेंच बोल रहे होते?

किंग चार्ल्स की बात सुनकर ठहाकों से गूंज उठा हॉल

जब किंग चार्ल्स III ने ट्रंप को यह करारा जवाब दिया, तो हॉल ठहाकों से गूंज उठा और ट्रंप भी मुस्कुराने लगे.

ब्रिटिश सेना ने व्हाइट हाउस की इमारत को जला दिया था

किंग चार्ल्स ने ट्रंप के साथ हंसी-मजाक करते हुए अमेरिका और ब्रिटेन के बीच के उतार-चढ़ाव भरे इतिहास को याद किया. उन्होंने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस शानदार इमारत में वापस आना खुशी की बात है, जो आपके लोकतंत्र का केंद्र है. उन्होंने हाल ही में हुए रेनोवेशन का जिक्र करते हुए मेहमानों को और भी हंसाया. उन्होंने 1812 के युद्ध का जिक्र करते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में कहा- अंग्रेजों ने 1814 में ही व्हाइट हाउस के रेनोवेशन का प्रयास किया था, जब ब्रिटिश सेना ने व्हाइट हाउस की इमारत को जला दिया था.

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Published by: Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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