जबरन नसबंदी का शिकार हुए लोगों को मिलेगा मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

जापान में जबरन नसबंदी का शिकार हुए लोगों को मुआवजा दिया जाएगा. जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है.

जापान में नसबंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सरकार को उन पीड़ितों को उचित मुआवजा देने का आदेश दिया जिनकी अब निरस्त किए जा चुके ‘यूजेनिक्स प्रोटेक्शन लॉ’ के तहत जबरन नसबंदी की गयी थी. कानून शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के संतान न पैदा करने के लिए तैयार किया गया था.

कब लागू किया गया था कानून

अनुमान है कि पैदा होने वाली संतानों में किसी प्रकार की शारीरिक कमी को रोकने के लिए इस कानून को बनाया गया था. 1950 से 1970 के बीच इस कानून के तहत बिना सहमति के करीब 25,000 लोगों की नसबंदी करवा दी गई थी. वादी के वकीलों ने इसे जापान में युद्ध के बाद के युग में सबसे बड़ा मानवाधिकार उल्लंघन इसे बताया था.

फैसला 39 में से 11 वादियों के लिए

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 1948 का यह कानून असंवैधानिक था. फैसला 39 में से 11 वादियों के लिए था जिन्होंने अपने मामले की देश के सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कराने के लिए जापान की 5 निचली अदालतों में मुकदमे लड़े. अन्य वादियों के मुकदमे अभी लंबित ही हैं. इनमें से कई वादी का जीवन व्हीलचेयर पर बीत रहा है. उन्होंने फैसले के बाद कोर्ट का धन्यवाद व्यक्त किया.

साबुरो किता ने क्या कहा

जापान की राजधानी टोक्यो में 81 वर्षीय वादी साबुरो किता ने फैसला आने के बाद कहा कि अपनी खुशी मैं बयां नहीं कर सकता. उन्होंने बताया कि उनकी 1957 में 14 साल की उम्र में नसबंदी कर दी गयी थी. उस वक्त वह एक अनाथालय में रहते थे. उन्होंने कई साल पहले अपनी पत्नी की मौत से कुछ समय पहले ही यह बात सार्वजनिक की थी.

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प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने मांगी माफी

प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने पीड़ितों से माफी मांगी है. उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने के लिए वादियों से मुलाकात करेंगे. किशिदा ने कहा कि सरकार नयी मुआवजा योजना पर विचार करेगी.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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