अमेरिकी एक्सपर्ट ने खोली ट्रंप की पोल! ईरान में 150+ लड़कियों की मौत US मिसाइल से ही हुई

Iran School Tomahawk Missile: ईरान के ऊपर 28 फरवरी को इजरायल-US द्वारा किए गए हमले में 150 से ज्यादा लड़कियां मारी गई थीं. इस मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ही जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की थी, लेकिन अब एक्सपर्ट ने खुलासा किया है कि यह हमला अमेरिका के टॉमहॉक मिसाइल से ही हुआ था.

Iran School Tomahawk Missile: ईरान के ऊपर 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर हमला किया. शुरुआती कुछ घंटों (लगभग 100) में ही दोनों ने मिलकर 2000 से ज्यादा मिसाइलें बरसाईं, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई शीर्ष नेता मारे गए. इसी हमले के दौरान दक्षिणी ईरान के मिनाब में एक नौसैनिक अड्डे पर भी हमला हुआ था. लेकिन इस अटैक में शजरह तैय्येबेह एलिमेंट्री स्कूल के पास स्थित एक स्कूल भी चपेट में आ गया, जहां कुल 175 लोगों की मौत हुई, जिनमें 150 से अधिक स्कूली लड़कियाँ शामिल थीं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस हमले से पल्ला झाड़ने की कोशिश की, लेकिन अब एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि यह अटैक यूएस टॉमहॉक मिसाइल से किया गया था. 

यह फुटेज ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज़ एजेंसी द्वारा जारी की गई थी और अखबार द्वारा सत्यापित की गई. रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में 28 फरवरी को मिनाब शहर में एक नौसैनिक सुविधा पर टॉमहॉक मिसाइल गिरते हुए दिखाई देती है. रविवार रात X (ट्विटर) पर एक लंबे चौड़े थ्रेड में पूर्व अमेरिकी सेना के एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल तकनीशियन ट्रेवर बेल ने वह फुटेज साझा की. उनके अनुसार पहले कभी सामने नहीं आई थी. 

इसमें मिसाइल को रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े परिसर की एक इमारत पर गिरते हुए दिखाया गया है. बेल के अनुसार, इससे ‘पहली बार यह संकेत मिलता है कि उस क्षेत्र पर अमेरिका ने हमला किया था.’ बेल ने यह भी कहा, ‘इस युद्ध में टॉमहॉक मिसाइल रखने वाला एकमात्र देश अमेरिका है. इजरायल के पास टॉमहॉक मिसाइल होने की जानकारी नहीं है.’ 

वीडियो और सैटेलाइट सबूत मिसाइल की पहचान टॉमहॉक के रूप में

रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो नौसैनिक अड्डे के सामने स्थित एक निर्माण स्थल से फिल्माया गया था. इसमें एक मिसाइल को उस इमारत पर गिरते हुए दिखाया गया है जिसे IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की सुविधा के भीतर स्थित एक मेडिकल क्लिनिक बताया गया है. मिसाइल के टकराने के बाद इमारत से धुआँ और मलबा उठता हुआ दिखाई देता है.

जब कैमरा आसपास के क्षेत्र की ओर घूमता है, तो प्राथमिक स्कूल के पास पहले से ही धूल और धुएँ के बड़े बादल दिखाई देते हैं. इससे संकेत मिलता है कि नौसैनिक अड्डे पर मिसाइल गिरने से कुछ समय पहले ही स्कूल पर हमला हो चुका था. अखबार ने बताया कि फुटेज की पुष्टि दृश्य संकेतों की तुलना करके की गई, जैसे कि मिट्टी का रास्ता, घास वाला इलाका और मलबे के ढेर, जिन्हें हमले के बाद ली गई सैटेलाइट तस्वीरों से मिलाया गया.

मेहर न्यूज द्वारा सैटेलाइट तस्वीरों, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य सत्यापित वीडियो का व्यापक विश्लेषण करने के बाद संकेत मिलता है कि इस हमले में नौसैनिक अड्डे के भीतर कई इमारतों को निशाना बनाया गया था.

टॉमहॉक अपनी स्पीड और वारहेड की वजह से खतरनाक

टॉमहॉक क्रूज मिसाइल एक लंबी दूरी का सटीक हथियार है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना करती है. अमेरिकी नौसेना के अनुसार, टॉमहॉक मिसाइल लगभग 1,000 मील (करीब 1,600 किलोमीटर) तक मार कर सकती है और इसमें लगभग 300 पाउंड TNT के बराबर विस्फोटक शक्ति वाला वारहेड होता है.

ट्रंप ने दावे पर जताया था संदेह

ये निष्कर्ष डोनाल्ड ट्रंप की उन टिप्पणियों से मेल नहीं खाते, जिनमें उन्होंने पहले सुझाव दिया था कि स्कूल को नुकसान पहुँचाने वाले हमले के लिए ईरान जिम्मेदार हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी हथियार बहुत ही कम सटीक होते हैं.  ट्रेवर बॉल और सुरक्षा विश्लेषक क्रिस कॉब-स्मिथ सहित विशेषज्ञों ने ईरान के स्कूल में हुए हमले के वीडियो में दिखाई देने वाले हथियार को टॉमहॉक मिसाइल के रूप में पहचाना.

ये भी पढ़े:- Iran: तेहरान बना ‘गैस चैंबर’, इजरायली हमले के बाद आसमान से बरस रही ‘काली मौत’   

ट्रेवर बॉल ने दिया प्रूफ

इस बात को स्पष्ट करने के लिए मेहर न्यूज द्वारा जारी वीडियो में उस मिसाइल की तुलना भी दिखाई गई, जिसने IRGC परिसर को निशाना बनाया था. एक अन्य टॉमहॉक मिसाइल के क्लोज-अप से उसका मिलान किया गया. बेल ने बताया कि वीडियो की जियोलोकेशन की जा चुकी है, यानी डिजिटल जानकारी के आधार पर उसकी सटीक लोकेशन की पुष्टि हो चुकी है. 

अपने थ्रेड में बेल ने IRGC परिसर की सैटेलाइट तस्वीरें और मिसाइल के प्रभाव क्षेत्र का एक ग्राफिक भी साझा किया. उन्होंने लिखा, ‘तस्वीरों से पता चलता है कि इस लाल शंकु (इम्पैक्ट जोन) के भीतर केवल दो इमारतों को नुकसान हुआ, जिनमें एक क्लिनिक शामिल है. दूसरी संरचना संभवतः मिट्टी से ढका हुआ बंकर है.’

ये भी पढ़े:- क्या है क्लस्टर बम? ईरान के इस हथियार से कांप उठा है इजरायल, आयरन डोम भी कन्फ्यूज

स्कूल पर हमले को लेकर ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान ने इस विस्फोट के लिए अमेरिका और इज़राइल दोनों को जिम्मेदार ठहराया. यह स्कूल एक घिरे हुए परिसर के बिल्कुल पास स्थित है, जिसे नक्शों में गार्ड के ‘सैय्यद अल-शोहदा सांस्कृतिक परिसर’ के रूप में दर्शाया गया है. इस परिसर में एक फार्मेसी, जिम और खेल का मैदान भी शामिल है. वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल की वरिष्ठ वकील एलिस बेकर ने कहा कि स्कूलों को निशाना बनाना सशस्त्र संघर्ष से संबंधित अंतरराष्ट्रीय कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >