आप से दुश्मनी नहीं, लेकिन मासूम बच्चों... ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकियों के नाम लिखा पत्र, 20 बड़ी बातें

Iran President Letter to US Citizens: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी नागिरकों के नाम पर पत्र लिखा है. उन्होंने चार पेज के इस लेटर में इतिहास और वर्तमान का जिक्र करते हुए युद्ध रोकने की अपील की है. उन्होंने इस पत्र में इजरायल के ऊपर अमेरिका को भटकाने का आरोप लगाया.

Iran President Letter to US Citizens: ईरान युद्ध के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी जनता के नाम एक खुला पत्र जारी किया है. यह पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण से चंद घंटे पहले जारी किया गया. पेजेश्कियान ने इसे अपने सोशल मीडिया पर साझा किया. इसमें उन्होंने बताया कि ईरान आम अमेरिकियों के प्रति ‘कोई दुश्मनी’ नहीं रखता. उन्होंने अपने पत्र में ईरान को खतरे के रूप में पेश किए जाने के दावे को खारिज किया. साथ ही उन्होंने अमेरिका पर ‘इजरायल के प्रॉक्सी’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया. पेजेश्कियान ने दशकों से चले आ रहे अविश्वास के लिए अमेरिका के हस्तक्षेप, प्रतिबंधों और हालिया हमलों को जिम्मेदार ठहराया.

पेजेश्कियान ने अपने चार पेज के लंबे पत्र में कई बातों का जिक्र किया. पेजेशकियन ने कहा कि ईरान ने अपने आधुनिक इतिहास में कभी भी आक्रामकता, विस्तारवाद, उपनिवेशवाद या प्रभुत्व का रास्ता नहीं चुना. उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी जनता अमेरिका के लोगों सहित किसी भी राष्ट्र के प्रति कोई दुश्मनी नहीं रखती.

पेजेश्कियन ने अपने पत्र में अमेरिका की जारी सैन्य कार्रवाई के आधार पर सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि क्या ईरान से कोई वास्तविक खतरा था, जो इस तरह के व्यवहार को सही ठहरा सके? उन्होंने कहा कि क्या मासूम बच्चों की हत्या या किसी देश को ‘पत्थर युग में वापस भेजने’ की शेखी बघारना, अमेरिका की वैश्विक छवि को और नुकसान पहुँचाने के अलावा किसी और उद्देश्य की पूर्ति करता है?

दुश्मन गढ़ने की कोशिश

उन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का भी जिक्र किया और कहा कि अमेरिका ने ईरान के आसपास अपने सबसे ज्यादा सैनिक, सैन्य ठिकाने और क्षमताएं तैनात कर रखी हैं. उन्होंने कहा कि ईरान को एक खतरे के रूप में पेश करना न तो ऐतिहासिक वास्तविकता के अनुरूप है और न ही वर्तमान तथ्यों के. उनके अनुसार; यह सब एक दुश्मन गढ़ने की कोशिश है, ताकि दबाव को जायज ठहराया जा सके, सैन्य प्रभुत्व बनाए रखा जा सके, हथियार उद्योग को चलाया जा सके और रणनीतिक बाजारों पर नियंत्रण रखा जा सके.

तख्तापलट के बाद गहराया अविश्वास

तनाव की जड़ों का जिक्र करते हुए पेजेशकियन ने 1953 के तख्तापलट को अमेरिका का अवैध हस्तक्षेप बताया, जिसने ईरान की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित किया और तानाशाही को बहाल कर दिया. उन्होंने लिखा यह मोड़ उस हस्तक्षेप से आया, जिसका उद्देश्य ईरान के अपने संसाधनों के राष्ट्रीयकरण को रोकना था. 

उन्होंने कहा कि इसके बाद की नीतियों ने ईरानियों के बीच अविश्वास को और गहरा कर दिया जब अमेरिका ने शाह का समर्थन किया, 1980 के दशक के युद्ध में सद्दाम हुसैन का साथ दिया, प्रतिबंध लगाए और बिना उकसावे के सैन्य आक्रामकता की, वह भी बातचीत के दौरान दो बार. इसके बावजूद, उन्होंने कहा कि ईरान ने साक्षरता, शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में मजबूती हासिल की है.

अमेरिका इजरायल के हित में काम कर रहा है?

उन्होंने सवाल उठाया, “क्या यह भी सच नहीं है कि अमेरिका इस आक्रामकता में इजरायल के प्रॉक्सी के रूप में शामिल हुआ है, उस शासन के प्रभाव और नियंत्रण में?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल “ईरान के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है” ताकि गाजा से ध्यान हटाया जा सके. वह चाहता है कि ईरान “आखिरी अमेरिकी सैनिक और आखिरी अमेरिकी टैक्सपेयर के पैसे तक लड़ता रहे.”

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टकराव के बजाय संवाद की अपील और अमेरिकियों के लिए सीधा संदेश

पेजेश्कियन ने मौजूदा स्थिति को एक निर्णायक मोड़ बताया और लगातार टकराव की बढ़ती लागत के बारे में चेतावनी दी. उन्होंने लिखा कि आज दुनिया एक चौराहे पर खड़ी है. टकराव के रास्ते पर आगे बढ़ना पहले से कहीं अधिक महंगा और निरर्थक हो गया है. उन्होंने अमेरिकियों से अपील की कि वे प्रचलित धारणाओं पर सवाल उठाएं और टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाएं.

अपने संदेश के अंत में, पेजेश्कियन ने अमेरिकियों से आग्रह किया कि वे उनके अनुसार फैलाई जा रही गलत जानकारी से आगे बढ़कर ईरान और उसके लोगों को व्यापक दृष्टिकोण से समझने की कोशिश करें. उन्होंने सवाल किया कि क्या ये वास्तविकताएँ उन विकृतियों से मेल खाती हैं, जो आपको ईरान और उसके लोगों के बारे में बताई जा रही हैं?

ईरान युद्ध के चरम पर सामने आया यह पत्र

यह पत्र ऐसे समय आया है जब तनाव काफी बढ़ा हुआ है. इसी दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान युद्धविराम चाहता है, जिसे तेहरान ने खारिज कर दिया है. अमेरिका और ईरान ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे पर हमले कर रहे हैं, होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी और रुकी हुई कूटनीति इस स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं. 

वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पत्र के बाद ईरान युद्ध पर पहली बार देश के नाम अपना पहला संबोधन दिया. उन्होंने कहा कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध का अंत अब नजदीक है. उनके भाषण की पूरी बात आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

पेजेश्कियान के पत्र की 20 बड़ी बातें 

  • ईरान दुनिया की सबसे प्राचीन और निरंतर चली आ रही सभ्यताओं में से एक है.
  • अपने आधुनिक इतिहास में ईरान ने कभी आक्रामकता, विस्तारवाद या उपनिवेशवाद का रास्ता नहीं चुना.
  • कई हमलों और दबावों के बावजूद ईरान ने कभी युद्ध की शुरुआत नहीं की, बल्कि आत्मरक्षा की.
  • ईरानी जनता किसी भी देश के लोगों, खासकर अमेरिका और यूरोप के प्रति शत्रुता नहीं रखती.
  • ईरानियों ने हमेशा सरकार और आम जनता के बीच स्पष्ट अंतर किया है.
  • ईरान को खतरे के रूप में पेश करना ऐतिहासिक और वर्तमान तथ्यों से मेल नहीं खाता.
  • शक्तिशाली देश अपने हितों के लिए दुश्मन की छवि गढ़ते हैं.
  • यह छवि सैन्य प्रभुत्व, हथियार उद्योग और बाजार नियंत्रण बनाए रखने के लिए बनाई जाती है.
  • अमेरिका ने ईरान के आसपास भारी सैन्य तैनाती कर रखी है.
  • हालिया अमेरिकी हमले दिखाते हैं कि यह सैन्य मौजूदगी खुद एक खतरा हो सकती है.
  • ऐसी स्थिति में ईरान का अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाना स्वाभाविक है.
  • ईरान की सैन्य तैयारी आत्मरक्षा पर आधारित है, आक्रामकता पर नहीं.
  • ईरान-अमेरिका संबंध शुरू में सामान्य थे, लेकिन 1953 का तख्तापलट एक टर्निंग पॉइंट बना.
  • इस हस्तक्षेप ने लोकतंत्र को कमजोर किया और अमेरिका के प्रति अविश्वास बढ़ाया.
  • बाद में शाह का समर्थन, सद्दाम हुसैन का साथ और प्रतिबंधों ने इस अविश्वास को और गहरा किया.
  • इन सबके बावजूद ईरान ने शिक्षा, तकनीक और स्वास्थ्य में बड़ी प्रगति की है.
  • साक्षरता दर 30% से बढ़कर 90% से अधिक हो गई है.
  • प्रतिबंधों और युद्ध का आम लोगों पर गंभीर और अमानवीय प्रभाव पड़ा है.
  • क्या यह वास्तव में अमेरिकी हित में है और क्या ईरान वास्तविक खतरा था.
    • पेजेश्कियान ने अंत में संवाद को टकराव से बेहतर बताते हुए दुनिया के भविष्य के लिए शांतिपूर्ण समाधान की अपील की.

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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