कतर के गैस प्लांट पर मिसाइल अटैक, ईरान के आगे बेबस हुए 12 मुस्लिम देश; कहा- 'हमले तुरंत रोको'

Iran Missile Attack Qatar: मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के बीच ईरान ने कतर के गैस प्लांट और यूएई के तेल ठिकानों को निशाना बनाया है. सऊदी अरब सहित बारह मुस्लिम देशों ने रियाद में एक आपातकालीन बैठक बुलाई और ईरान से तुरंत लड़ाई रोकने की मांग की.

Iran Missile Attack Qatar: मिडिल ईस्ट में तनाव अब खतरनाक लेवल पर पहुंच गया है. गुरुवार, 19 मार्च 2026 को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में 12 अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों ने एक इमरजेंसी मीटिंग की. इस मीटिंग में ईरान से अपनी हमलें तुरंत रोकने और इंटरनेशनल कानूनों का सम्मान करने को कहा गया है. 

इन देशों ने एक सुर में ईरान के उन हमलों की निंदा की है, जिसमें जॉर्डन, अजरबैजान और तुर्की जैसे देशों के रिहायशी इलाकों, तेल ठिकानों, एयरपोर्ट्स और डिप्लोमैटिक बिल्डिंग्स को निशाना बनाया गया है. साथ ही, इन मंत्रियों ने लेबनान पर इजरायली हमलों की भी आलोचना की और लेबनान की सुरक्षा का समर्थन किया.

LNG ठिकानों पर गिरीं मिसाइलें

ईरान ने कतर के बेहद अहम ‘रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी’ पर मिसाइलों से हमला किया है. ‘X’ (ट्विटर) पर जानकारी देते हुए कतर-एनर्जी ने बताया कि बुधवार 18 मार्च 2026 को पर्ल GTL प्लांट पर हमले के बाद, गुरुवार 19 मार्च की सुबह फिर से कई LNG ठिकानों को निशाना बनाया गया. कतर के आंतरिक मंत्रालय और कतर-एनर्जी के मुताबिक, इन हमलों से वहां भीषण आग लग गई और काफी नुकसान हुआ है. हालांकि, राहत की बात ये है कि किसी की जान जाने की खबर नहीं है और इमरजेंसी टीमें आग बुझाने में जुटी हैं.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसा दुनिया का व्यापार

यह पूरी जंग 28 फरवरी 2026 से शुरू हुई थी. तब से अब तक ईरान लगातार खाड़ी देशों के एनर्जी सेंटर्स और समुद्री रास्तों को निशाना बना रहा है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में दखलअंदाजी बढ़ गई है, जहां से दुनिया का 20% तेल गुजरता है. इस युद्ध में अब तक ईरान में 1300, लेबनान में 960 और इजरायल में 14 लोगों की मौत हो चुकी है. अमेरिकी सेना के मुताबिक, उनके भी 13 सैनिक मारे गए हैं और करीब 200 घायल हुए हैं.

अबू धाबी में भी मचा हड़कंप

मिसाइल हमलों का असर अब यूएई तक पहुंच गया है. अबू धाबी मीडिया ऑफिस के अनुसार, हबशान गैस प्लांट को बंद करना पड़ा है क्योंकि वहां इंटरसेप्ट की गई मिसाइलों का मलबा गिरा था. इसके अलावा बाब ऑयलफील्ड और अन्य गैस ठिकानों पर भी अलर्ट जारी है. फिलहाल वहां ऑपरेशंस रोक दिए गए हैं ताकि कोई बड़ा हादसा न हो.

ऑपरेशन ‘ट्रू प्रॉमिस 4’  

ईरानी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ के मुताबिक, ईरान की सेना और IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स) ने मिलकर ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ शुरू किया है. ईरान का कहना है कि यह 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमले का बदला है. प्रेस टीवी के अनुसार, ईरान अब तक 63 बार मिसाइल और ड्रोन अटैक कर चुका है. वहीं, हिजबुल्लाह और इराकी रेजिस्टेंस ग्रुप्स भी इजरायली और अमेरिकी ठिकानों को लगातार निशाना बना रहे हैं. हिजबुल्लाह ने इन हमलों के पीछे आयतुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई की हत्या और इजरायल द्वारा सीजफायर तोड़ने को मुख्य वजह बताया है.

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सऊदी अरब का कड़ा रुख

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने ईरान की इस हरकत को ‘ब्लैकमेल’ करने की कोशिश बताया है. उन्होंने साफ कहा कि ईरान के साथ जो थोड़ा-बहुत भरोसा बचा था, वह अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. रियाद में हुई मीटिंग में उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान नहीं रुका, तो सऊदी अरब अपनी सुरक्षा के लिए मिलिट्री एक्शन लेने से पीछे नहीं हटेगा. प्रिंस फैसल ने कहा कि ईरान का यह तर्क बिल्कुल गलत है कि वह अमेरिकी बेस की वजह से हमले कर रहा है. सऊदी अरब अब ईरान को रोकने के लिए पॉलिटिकल, इकोनॉमिक और डिप्लोमैटिक, हर तरह के पावर का इस्तेमाल करेगा.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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