युद्ध के बीच ईरान का सबसे बड़ा नोट लांच, कीमत 1 करोड़ रियाल, लेकिन रुपये के सामने बौनी

Iran Launches Biggest Note Ever: ईरान ने 1,00,00,000 रियाल का नोट जारी किया है. इतनी बड़े डिनॉमिनेशन वाला नोट उसके इतिहास का सबसे बड़ा करेंसी नोट है. इससे पहले 50 लाख रियाल नोट जारी किया गया था. इजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध में फंसे ईरान ने आर्थिक संकट से निकलने का एक और दांव चला है.

Iran Launches 10 Million Rial Note: ईरान इस समय युद्ध और आर्थिक संकट दोनों का सामना कर रहा है. इसी बीच सरकार ने 1 करोड़ रियाल का नया नोट जारी किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा बैंकनोट है. हैरानी की बात यह है कि इसकी कीमत सिर्फ करीब 7 डॉलर, यानी लगभग 650 रुपये के बराबर है. इस गुलाबी रंग के नोट के सामने 9वीं सदी की जामे मस्जिद (यज्द) की तस्वीर है, जबकि पीछे 2,500 साल पुराने ऐतिहासिक बाम किले को दिखाया गया है. इससे पहले फरवरी की शुरुआत में 50 लाख रियाल का नोट जारी हुआ था, लेकिन अब यह नया नोट उससे भी बड़ा है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नोट बाजार में आ चुका है. सरकार का कहना है कि इसे लोगों तक नकदी आसानी से पहुंचाने के लिए लाया गया है, हालांकि डिजिटल भुगतान को ही प्राथमिकता दी जा रही है. इसके बावजूद एटीएम के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और कई मशीनों में पैसे खत्म हो चुके हैं. लोगों को डर है कि अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव के कारण इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम कभी भी ठप हो सकता है, इसलिए वे ज्यादा से ज्यादा नकदी निकाल रहे हैं.

ईरान की आर्थिक हालत खस्ताहाल

ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर थी, जिस पर अब हालात और भारी पड़ रहे हैं. देश की मुद्रा रियाल गिरकर करीब 16 लाख प्रति डॉलर तक पहुंच गई है. लंबे समय से लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, वैश्विक वित्तीय सिस्टम से दूरी और अंदरूनी आर्थिक समस्याओं ने हालात को और बिगाड़ दिया है.

महंगाई तेजी से बढ़ रही है, जिससे आम लोगों की जिंदगी मुश्किल होती जा रही है. रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गई हैं और पिछले एक साल में खाने-पीने की चीजों के दाम लगभग दोगुने हो चुके हैं. कई जरूरी सामान तो इससे भी ज्यादा महंगे हो गए हैं, जिससे लोगों को अपने खर्च कम करने पड़ रहे हैं.

महंगाई को लेकर लोगों का गुस्सा पहले भी सामने आ चुका है. दिसंबर 2025 के अंत और जनवरी 2026 की शुरुआत में तेहरान के मशहूर बाजार से विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे, जिन पर सख्ती से कार्रवाई की गई. उस समय भी रियाल की कीमत तेजी से गिरी थी और प्रोटेस्ट का आधार भी वही था. इन प्रदर्शनों के दौरान, इंटरनेट बंद होने से छोटे कारोबारियों को भारी नुकसान हुआ, क्योंकि उनका काम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निर्भर था.

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एक घंटे लाइन में लगने पर मिले सिर्फ 3 करोड़ रियाल

ऐसे हालात में भले ही 1 करोड़ रियाल का नोट कागज पर बड़ा लगे, लेकिन इसकी कम डॉलर वैल्यू यह दिखाती है कि देश की अर्थव्यवस्था पर कितना दबाव है. महंगाई लगातार लोगों की खरीद क्षमता को कम कर रही है, जिससे रोजमर्रा की चीजें महंगी होती जा रही हैं और बचत की कीमत घटती जा रही है. 

केंद्रीय बैंक का कहना है कि नया नोट सिर्फ नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए है, जबकि डिजिटल भुगतान सिस्टम ही मुख्य माध्यम बना रहेगा. लेकिन जमीन पर हालात अलग हैं. बैंकों से लोगों को सीमित मात्रा में ही पैसे मिल रहे हैं. एक स्थानीय व्यक्ति के मुताबिक, उसे एक घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद सिर्फ 1 करोड़ रियाल ही दिए जा रहे थे. काफी आग्रह करने पर उसे 3 करोड़ रियाल मिले.

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इस बीच युद्ध का असर भी साफ दिख रहा है. इजरायल और अमेरिका के हमलों में ईरान के बैंक भी हमलों का निशाना बने हैं, जिससे कारोबार धीमा पड़ गया है. इसी महीने की शुरुआत में बैंक सेपाह की एक इमारत पर मिसाइल हमला हुआ, जिससे उसे नुकसान पहुंचा. यह इमारत सेना और आम जनता दोनों को सेवाएं देती थी.

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By Anant narayan shukla

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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