मंगलवार (1 सितंबर) को अमेरिका ने ईरान पर ताजा हमले किए. अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तट पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इन ठिकानों का संबंध ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से बताया गया है. इसके जवाब में ईरान ने भी हमला किया. ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे. इन हमलों में क्षेत्र के अमेरिकी ठिकानों और उनसे जुड़े ठिकानों को टारगेट किया गया. जॉर्डन-बहरीन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को ईरान ने टारगेट किया.
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती लड़ाई से दुनिया की चिंता बढ़ गई है. छह महीने से जारी संघर्ष फिर तेज हो सकता है. इसका असर होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले तेल कारोबार पर पड़ सकता है. मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत 4 डॉलर से ज्यादा बढ़ी. तेल की कीमत पांच हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई.
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ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के ठिकानों को निशाना बनाया
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान में एक और हमले की पुष्टि की है. अमेरिकी सेना ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के ठिकानों को निशाना बनाया. इनमें एयर डिफेंस सिस्टम और रडार शामिल हैं. समुद्री सैन्य ठिकानों पर भी हमला किया गया. इसके अलावा बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता और कम्युनिकेशन सेंटर को भी निशाना बनाया गया.
सेंटकॉम ने कहा, "ये होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर आईआरजीसी के हालिया हमले के प्रयासों के जवाब में किए गए हैं."
अमेरिका ने कहा कि यह हमला ईरान की हालिया गतिविधियों के जवाब में किया गया. अमेरिका के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की थी. इसके अलावा क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर भी हमले का प्रयास किया गया. इसी के जवाब में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ यह सैन्य कार्रवाई की.
ईरान ने दिया अमेरिका के हमलों का जवाब
ईरान ने भी अमेरिका के हमलों का जवाब दिया. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इसे हमलावरों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई बताया. उसने कहा कि अमेरिका के ताजा हमलों से उसका रुख और मजबूत हुआ है. ईरान अब अमेरिकी सैनिकों का सामना करने के लिए पहले से ज्यादा तैयार है.
