Iran US War: ईरान ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी AWACS विमान को नष्ट कर दिया है. ईरान की समाचार एजेंसी IRNA ने अपने पोस्ट में इससे जुड़ी तस्वीरें शेयर की हैं. IRNA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि जारी तस्वीरें यह बता रही हैं कि अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली उतनी प्रभावी नहीं है, जितना अमेरिका दावा करता है. अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम अपने सबसे अहम सैन्य ठिकानों की सुरक्षा करने में भी नाकाम रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर तैनात अमेरिकी वायुसेना के विमान को ईरान ने निशाना बनाया है. न्यूज एजेंसी ने विमान पर हमले की 3 तस्वीरें शेयर की हैं. इसमें दिख रहा है कि हमले में विमान के पीछे वाले हिस्से को काफी नुकसान पहुंचा है. हालांकि, ईरान ने यह हमला ड्रोन से किया है या मिसाइल से इसकी सटीक जानकारी नहीं मिली है.
2500 अमेरिकी मरीन सैनिक पहुंचे मिडिल ईस्ट
मिडिल ईस्ट में करीब एक महीने से जारी जंग के बीच अमेरिका के लगभग 2,500 मरीन सैनिक खाड़ी क्षेत्र पहुंच गये हैं. पिछले दो दशकों में अमेरिका की यह सबसे बड़ी सैन्य तैनाती है. इसके अलावा 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के कम से कम 1000 पैराट्रूपर्स को भी मिडिल ईस्ट भेजने का आदेश दिया गया है. यह दुश्मन के इलाके में उतरकर अहम ठिकानों और हवाई पट्टियों को सुरक्षित करने में सक्षम हैं.
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका जमीनी बल उतारने के साथ ही अपने सभी उद्देश्यों को हासिल कर सकता है.
ईरान पर अमेरिका और इजराइल का हमला जारी
अमेरिका और इजराइल लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं. वहीं, जवाबी कार्रवाई में ईरान इजराइल और खाड़ी के पड़ोसी अरब देशों को निशाना बना रहा है. रविवार को ईरान ने इजराइल की ओर दर्जनों मिसाइलें दागीं. वहीं खाड़ी देशों में वायु रक्षा प्रणालियों ने कई ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया. इस संघर्ष में अब तक 3000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. तेहरान में प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शनिवार देर रात शहर में भीषण हवाई हमले हुए. वहीं, अमेरिका का कहना है कि इस युद्ध के दौरान उसने ईरान के 11000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं.
ईरान ने यूनिवर्सिटी को नुकसान पहुंचाने की दी चेतावनी
रविवार को ईरान ने इलाके में स्थित इजराइली और अमेरिकी यूनिवर्सिटी को निशाना बनाने की धमकी दी है. ऐसा पहली बार है जब ईरान ने शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाने की खुले तौर पर धमकी दी है. ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड ने एक बयान में चेतावनी दी कि यदि ईरानी विश्वविद्यालयों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो क्षेत्र में मौजूद इजराइली विश्वविद्यालयों और अमेरिकी विश्वविद्यालयों के परिसर को सीधे तौर पर निशाना बनाया जाएगा.
अमेरिका को 30 मार्च दोपहर तक ईरान ने दी डेडलाइन
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा है कि यदि अमेरिकी सरकार चाहती है कि क्षेत्र में उसके विश्वविद्यालय सुरक्षित रहे, तो वह सोमवार 30 मार्च दोपहर 12 बजे तक आधिकारिक बयान जारी कर ईरानी विश्वविद्यालयों पर हो रहे हमलों की निंदा करे. इसके साथ ही इसने अमेरिका से यह भी मांग की कि वह इजराइल को ईरानी विश्वविद्यालयों और शोध केंद्रों पर हमले करने से रोके, जिन पर हाल के दिनों में लगातार हमले हुए हैं.
28 फरवरी से जारी है युद्ध
ईरान और अमेरिका-इजराइल की जंग 28 फरवरी को शुरू हुई. एक महीने बाद भी लड़ाई जारी है. इस संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है. कच्चे तेल के दाम आसमान छूने लगे हैं. युद्ध के कारण उर्वरकों का संकट पैदा हो गया है और हवाई यात्रा भी प्रभावित हुई है. रणनीतिक महत्व वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के नियंत्रण ने बाजारों को हिला दिया है.
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