Iran War Saudi Arabia: क्या सऊदी अरब ईरान पर हमला करने वाला है? अब यह सवाल भी उठने लगा है. क्योंकि सऊदी प्रशासन जिस तरह अपनी कूटनीति का दायरा बढ़ा रहा है, उससे ऐसा संभव लगने लगा है. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने शनिवार को तुर्की, ब्रिटेन और साइप्रस के शीर्ष नेताओं से बात की. वहीं सऊदी अरब के रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने पाकिस्तान के सीडीएफ से बातचीत की. यह बातचीत ऐसे समय हुई जब मध्य पूर्व ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर रहा है. इन बातचीतों में उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ऐसे किसी भी कदम को स्वीकार नहीं करेगा जो क्षेत्रीय स्थिरता को कमजोर करे. तेजी से बढ़ते संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट में नए सैन्य और राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं.
यह कूटनीतिक गतिविधि ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. अमेरिका और इजरायल ने साझा कार्रवाई में 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमला करके उसके सुप्रीम लीडर समेत तमाम शीर्ष सैन्य नेतृत्व को खत्म कर दिया. इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिसमें मिडिल ईस्ट के देश भी शामिल हो गए, क्योंकि अमेरिका के सैन्य बेस इन्हीं देशों में थे.
ईरान ने पहली बार खाड़ी देशों पर किया हमला
ईरान ने इतिहास में पहली बार सभी खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हमले किए. इन हमलों में तेल और गैस से जुड़े ढांचों को खास तौर पर निशाना बनाया गया. शनिवार को सऊदी अरब के शायबह तेल क्षेत्र पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की गई, जबकि कतर की एलएनजी सुविधाओं पर सफल हमले हुए. हालांकि कई मिसाइलों और ड्रोन को पैट्रियट और थाड एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया, लेकिन गिरते मलबे और सीधे हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र के कई शहरों में भारी नुकसान और हताहत हुए हैं.
ऊर्जा ठिकानों को बनाया निशाना
ईरान ने इससे पहले सऊदी अरब में रास तनुरा ऑयल रिफाइनरी एक्सपोर्ट फैसिलिटी पर हमला किया. बहरीन में भी उसने शुक्रवार को हमला किया. वहीं ईरान की आईआरजीसी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ब्लॉक करने की घोषणा की है. इन हमलों और नाकाबंदी की वजह से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत एलएनजी आपूर्ति अस्थायी रूप से रुक गई. ऐसे में पूरी दुनिया में तेल और गैस की कीमतें बढ़ रही हैं. पाकिस्तान में तो एक दिन में 55 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि भारत में अभी तक दाम नहीं बढ़े हैं, लेकिन यही हाल रहा तो यहां भी यही स्थिति आ सकती है.
तुर्की के ऊपर हुआ था हमला, क्राउन प्रिंस ने बात की
अरब न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन से बातचीत में क्राउन प्रिंस ने तुर्की पर हुए हालिया ईरानी हमलों की निंदा की. उन्होंने कहा कि सऊदी अरब तुर्की की सुरक्षा और उसकी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए उठाए गए सभी कदमों का पूरा समर्थन करता है. तुर्की ने हाल ही में बताया कि नाटो की एयर डिफेंस प्रणाली ने पूर्वी भूमध्यसागर के ऊपर ईरान की एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोक लिया. इससे यह संकेत मिलता है कि युद्ध का क्षेत्र और भी फैल रहा है.
इसी युद्ध के दौरान तुर्की के रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल को रोकने के दौरान इस्तेमाल किए गए वायु रक्षा गोला-बारूद का कुछ हिस्सा हाते प्रांत के डोर्त्योल इलाके में गिरा, लेकिन इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. तुर्की ने कहा कि वह अपने क्षेत्र और नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है और यदि किसी भी प्रकार का शत्रुतापूर्ण कदम उठाया जाता है तो उसका जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है. साथ ही तुर्की ने क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने की अपील करते हुए कहा कि वह इस मामले में नाटो और अन्य सहयोगियों के साथ लगातार परामर्श करता रहेगा.
ब्रिटेन और साइप्रस के नेताओं से भी की बात
वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी सऊदी अरब के लिए अपने देश के मजबूत समर्थन की पुष्टि की. उन्होंने सऊदी जमीन पर हुए ईरान के ‘अंधाधुंध और लापरवाह’ हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि ब्रिटेन सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों के साथ खड़ा है. वहीं क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने साइप्रस के राष्ट्रपति से बातचीत में कहा कि यह सैन्य टकराव अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है. दरअसल एक मिसाइल साइप्रस में ब्रिटिश सेना के बेस पर गिरी. दावा किया गया कि यह मिसाइल ईरान की ओर से दागी गई थी.
पाकिस्तान भी सऊदी अरब के साथ
सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने रियाद में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर से मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते को सक्रिय करने की बात कही है, जिससे पाकिस्तान पर ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का दबाव बढ़ गया है. सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच जॉइंट स्ट्रैटेजिक डिफेंस एग्रीमेंट हुआ था, जिसके तहत किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाता है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी कहा है कि उनका देश इस समझौते से बंधा हुआ है, हालांकि फिलहाल पाकिस्तान सीधे युद्ध में कूदने के बजाय कूटनीतिक दबाव बनाने की नीति अपना रहा है.
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अजरबैजान पर भी हुआ हमला
ईरान ने अब तक पाकिस्तान के ऊपर कोई हमला नहीं किया है, लेकिन अजरबैजान पर ड्रोन गिरने की खबर सामने आई है. अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार गुरुवार को दो ड्रोन हमले हुए, जिनमें एक ने नखचिवान एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन को निशाना बनाया जबकि दूसरा शकराबाद गांव के पास एक स्कूल के नजदीक गिरा. इस घटना में दो नागरिक घायल हुए और एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचा.
अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने इस हमले को ‘कायरतापूर्ण’ और ‘आतंकी कार्रवाई’ बताते हुए ईरान से आधिकारिक माफी की मांग की और चेतावनी दी कि उनका देश उचित जवाबी कदम उठाने का अधिकार रखता है. इस बीच तेहरान ने इस हमले में किसी भी भूमिका से साफ इनकार किया है, लेकिन इस घटना ने मध्य पूर्व और दक्षिण काकेशस क्षेत्र में पहले से बढ़े तनाव को और गहरा कर दिया है.
क्या ईरान के ऊपर संयुक्त हमला होगा?
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ऐसी आशंकाएँ सामने आ रही हैं कि सऊदी अरब कई देशों को साथ लेकर ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल सकता है. तुर्की और पाकिस्तान के साथ ‘इस्लामिक नाटो’ जैसी चर्चा पहले से चल रही थी और अब इसे जमीन पर उतारने की संभावना भी जताई जा रही है. वहीं नाटो मेंबर के ऊपर पहले ही हमला हो चुका है, जिसकी संधि में आर्टिकल 5 है, जिसमें एक देश पर हमला दूसरे देश पर हमला हुआ माना जाएगा. तुर्की और ब्रिटेन दोनों पर हमला करके ईरान ने यह गलती कर ही दी है.
वहीं पाकिस्तान और अजरबैजान के युद्ध में शामिल होने की स्थिति में ईरान के खिलाफ जमीनी मोर्चा भी खुल सकता है. अजरबैजान के इजरायल के साथ मजबूत रक्षा संबंध हैं और उसे वहां से आधुनिक हथियार मिलते हैं. ईरान लंबे समय से आशंका जताता रहा है कि अजरबैजान की जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ किया जा सकता है. नखचिवान पर ड्रोन हमले के बाद अजरबैजान ने ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है.
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान और अजरबैजान भी युद्ध में शामिल हो जाते हैं तो ईरान कई मोर्चों पर घिर सकता है. अजरबैजान उत्तर से, पाकिस्तान पूर्व से और सऊदी अरब दक्षिण-पश्चिम से दबाव बना सकते हैं. हालांकि अभी तक किसी संयुक्त सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और आने वाले दिनों में ही साफ होगा कि क्षेत्रीय देश सीधे युद्ध में उतरते हैं या कूटनीतिक और रणनीतिक दबाव के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश करते हैं.
