होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे विदेशी जहाज, खुमैनी बंदरगाह पर हुई अनलोडिंग, युद्ध के बीच ईरान ने क्या मंगाया?

Iran Allows Ships Through Hormuz Strait: ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने जहाजों की तैनाती करते हुए इस पूरे शिपिंग रूट पर पाबंदी लगा दी है. इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल और गैस संकट पैदा हो गया है. दाम बढ़ने के साथ ही इन दोनों कमोडिटी की कमी भी पैदा हो गई है. हालांकि, ईरान ने अपने पोर्ट पर 9 मार्च से 16 मार्च तक कुछ जहाजों को आने की इजाजत दी है.

Iran Allows Ships Through Hormuz Strait: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (होर्मुज स्ट्रेट) में समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. आम दिनों में जहां बड़ी संख्या में तेल और मालवाहक जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं अब बेहद सीमित जहाजों को ही अनुमति मिल रही है. इस मार्ग की जोखिम भरी स्थिति का अंदाजा 11 मार्च की घटना से लगाया जा सकता है, जब ‘स्टार ग्वेनेथ’ नामक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ. हालांकि, ईरान की इस नाकेबंदी के बावजूद कुछ चुनिंदा जहाज यहां से गुजरे. इन पर तेल नहीं बल्कि केवल अनाज और कृषि उत्पाद हैं. इन्हें इसलिए गुजरने दिया गया, ताकि ईरान के भीतर खाद्य आपूर्ति बनी रह सके.

28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद से इस अहम जलमार्ग पर आवाजाही लगभग ठप जैसी हो गई है. मौजूदा स्थिति में जो जहाज गुजर रहे हैं, उनमें ज्यादातर बल्क कार्गो शिप शामिल हैं, जो खाद्यान्न और कृषि उत्पाद लेकर आ रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन जहाजों में अधिकतर ग्रीक प्रबंधन के तहत संचालित हैं. इससे वे पश्चिमी देशों से जुड़े उन कुछ गिने-चुने जहाजों में शामिल हो गए हैं, जो अब भी इस खतरनाक रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं.

कुछ जहाजों ने किया आवागमन

समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 15 से 16 मार्च के बीच कम से कम छह जहाजों ने उत्तरी खाड़ी के प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र इमाम खुमैनी बंदरगाह पर माल उतारने के बाद जलडमरूमध्य पार किया. वहीं डेटा एनालिटिक्स कंपनी केपलर के मुताबिक, 9 मार्च के बाद पांच अन्य जहाजों ने भी वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेते हुए इस रास्ते का उपयोग किया. इनमें ‘जियाकोमेत्ती’ नाम का जहाज भी शामिल है, जो कनाडा से सोयाबीन लेकर खाड़ी क्षेत्र में पहुंचा.

खाद्य सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदम

इन सीमित शिपमेंट का मुख्य उद्देश्य देश के भीतर खाद्य आपूर्ति को बनाए रखना है. ईरान अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खुद पैदा करता है, लेकिन अनाज और तिलहन के लिए उसे आयात पर निर्भर रहना पड़ता है. इनका इस्तेमाल खाने के तेल और पशुओं के चारे के रूप में होता है.

कृषि क्षेत्र बना कमजोर कड़ी

विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान का कृषि क्षेत्र पहले से ही दबाव में है. हर साल करीब 15 लाख टन मक्का उत्पादन होने के बावजूद देश को 80 लाख से 1 करोड़ टन तक मक्का आयात करना पड़ता है, जो मुख्य रूप से ब्राजील से आता है. वहीं पानी की कमी ने ईरान की स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है.

ये भी पढ़ें:- जंग के मैदान से ट्रंप-पुतिन के साथ सेल्फी तक… फेक महिला सैनिक जिसके लाखों दीवाने, रातों-रात कहां गई?

भंडारण से राहत, सरकार की अपील

28 फरवरी 2026 को युद्ध शुरू होने से पहले ही ईरान ने करीब 40 लाख टन गेहूं का भंडार तैयार कर लिया था, जो लगभग 4 महीने की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है. कृषि मंत्री गोलामरेजा नूरी गजलजेह ने बताया कि इसके अलावा बेकरी सेक्टर के लिए भी करीब दो महीने का आटा आवंटित किया जा चुका है. सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर जरूरत से ज्यादा खरीदारी न करें, ताकि आपूर्ति संतुलित बनी रहे.

ये भी पढ़ें:- बंगाली हिंदुओं के खिलाफ पाकिस्तानी अत्याचारों को नरसंहार घोषित किया जाए, US संसद में आया प्रस्ताव

तेहरान का नियंत्रण और वैश्विक असर

ईरान द्वारा इस जलमार्ग पर कड़े नियंत्रण के कारण वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है. सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है. ऐसे में आवाजाही कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में उछाल देखने को मिला है. 

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Anant narayan shukla

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

इतिहास, राजनीति और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि रही है, जिसने उन्हें वैश्विक मामलों और अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. यही वजह है कि उनके लेखों में विषय की गहराई, एक्सपर्ट्स की राय के साथ उनके कमेंट्स, तथ्यों की सटीकता और व्यापक संदर्भ देखने को मिलता है. बदलते वैश्विक परिदृश्य पर उनकी पैनी नजर रहती है, जिससे वे पाठकों तक समय पर विश्वसनीय और विश्लेषणात्मक जानकारी पहुंचाते हैं.

अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

तथ्यों की पुष्टि और सटीक जानकारी को वे अपनी पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं. उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को विश्व घटनाक्रम की भरोसेमंद, संतुलित और गहन जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध हो, ताकि वे वैश्विक मुद्दों को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >