India Bound LPG Carrier crosses Hormuz: ईरान युद्ध की वजह से अमेरिका और खुद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी की है. बीते 4 मार्च से इस संकरे समुद्री रास्ते से तेल और गैस जैसी अहम सप्लाई पर संकट पैदा हुआ है. भारत समेत विश्व के तमाम कार्गो जहाज फारस की खाड़ी में स्थित इस स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं. हालांकि, बीच-बीच में एक दो जहाज ईरान की ‘परमिशन’ के साथ निकल पा रहे हैं. शनिवार को भारत की ओर आ रहा एलपीजी सुपरटैंकर सर्व शक्ति ने होर्मुज को पार किया है. इसके 13 मई को विशाखापट्टनम तक पहुंचने की उम्मीद है.
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला यह एलपीजी कैरियर 46,313 टन एलपीजी लेकर चल रहा है और इसमें 20 क्रू सदस्य हैं, जिनमें 18 भारतीय शामिल हैं. इस वेरी लार्ज गैस कार्गो (VLGC) का स्वामित्व सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कार्पोरेशन के पास है. यह पहले भी भारतीय बंदरगाहों और फारस की खाड़ी के बीच यात्रा कर चुका है.
कैसे निकला एमटी सर्व शक्ति?
मरीन ट्रैफिक के डेटा के अनुसार, एलपीजी टैंकर ने शनिवार को लरक और केश्म आईलैंड के पास से गुजरते हुए ओमान की खाड़ी की दिशा में यात्रा की. तेहरान ने इसी रूट को इस संवेदनशील मार्ग से गुजरने के लिए निर्धारित किया है. एक और समाचार एजेंसी के अनुसार, यह जहाज फरवरी की शुरुआत में पर्शियन गल्फ में दाखिल हुआ था. इसके बाद इसने दुबई के पास शिप टू शिप ट्रांसफर के जरिए कार्गो प्राप्त किया था.
2 हफ्ते बाद निकला पहला भारतीय जहाज
यह जहाज अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी लागू होने के बावजूद होर्मुज को पार करने वाला पहला भारत से जुड़ा जहाज बन गया है. इस जहाज की सुरक्षित आवाजाही इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में भारत की ओर आने वाले और भी जहाज इस जलडमरूमध्य को पार कर सकते हैं. चाहे वे भारतीय झंडे वाले हों या विदेशी. इससे ऊर्जा आपूर्ति और क्रू की सुरक्षा को लेकर बड़ी राहत मिल सकती है.
भारत को मिलेगी राहत
एलपीजी टैंकर का सुरक्षित मार्ग से गुजरना दुनिया के सबसे बड़े कुकिंग ऑयल आयातकों में से एक भारत के लिए राहत लेकर आने की उम्मीद है. भारत को ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ रहा है. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल और इनपुट लागत में बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा असर एलपीजी की कीमतों पर पड़ता है, खासकर कमर्शियल सिलेंडरों के मामले में.
सर्व शक्ति का पार करना क्यों अहम?
होर्मुज की नाकेबंदी की वजह से इस जलमार्ग को पार करने वाला भारत की ओर आने वाला आखिरी जहाज देश गरिमा (ऑयल टैंकर) था. इसने 18 अप्रैल को यह रास्ता पार किया था. उस समय ईरान ने कुछ समय के लिए सुरक्षित मार्ग देने की घोषणा की थी. वहीं, सर्व शक्ति का इस मार्ग से गुजरना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस दिन देश गरिमा ने यह रास्ता पार किया था, उसी दिन दो भारतीय जहाजों पर ईरान की ओर से फायरिंग हुई थी. इसके चलते कई जहाजों को वापस फारस की खाड़ी से लौटना पड़ा था.
अब तक कितने भारतीय जहाज गुजरे और कितने फंसे?
मार्च से अब तक 10 भारतीय झंडे वाले जहाज इस जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं. इनमें 9 एलपीजी टैंकर और 1 कच्चे तेल का जहाज शामिल हैं. इसके अलावा कुछ विदेशी झंडे वाले ऊर्जा टैंकर भी पर्शियन गल्फ से भारत के बंदरगाहों तक पहुंचे हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल पर्शियन गल्फ में 13 भारतीय झंडे वाले और 1 भारतीय स्वामित्व वाला जहाज मौजूद है. पिछले हफ्ते शिपिंग मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के साथ 41 भारत आने वाले (इंडिया बाउंड) प्राथमिक जहाजों की सूची साझा की थी, जिन्हें सुरक्षित निकालना जरूरी माना गया है.
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ईरान-अमेरिका तनाव बरकरार
पश्चिम एशिया के इस ईरान अमेरका संघर्ष को समाप्त करने पर भी बातचीच चल रही है. ईरान ने इसके लिए अमेरिका के पास अपना प्रस्ताव भेजा है. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के ताज़ा प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं. इसमें तेहरान ने बाद में परमाणु वार्ता करने के साथ-साथ जलडमरूमध्य खोलने का प्रस्ताव दिया था. ट्रंप और उनके प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी शांति प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह रोकना शामिल होगा, जबकि तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण नागरिक उपयोग के लिए है.
फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है, क्योंकि ईरानी बंदरगाहों के आसपास अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी जारी है. ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में “समुद्री डाकुओं की तरह” व्यवहार कर रही है, क्योंकि उसने कुछ ईरानी जहाजों को जब्त कर लिया है.
