सिलिकॉन वैली में 10 अप्रैल को आयोजित होगा हैकाथन, कोरोना संकट से भारत के सामने खड़ी चुनौतियों पर होगी चर्चा

कोरोना वायरस महामारी से भारत के सामने खड़ी कठिन चुनौतियों का हल निकालने के लिए देश में रणनीति तैयार होने के साथ ही सात समंदर पार अमेरिका में भी मंथन किया जा रहा है.

नयी दिल्ली : कोरोना वायरस महामारी से भारत के सामने खड़ी कठिन चुनौतियों का हल निकालने के लिए देश में रणनीति तैयार होने के साथ ही सात समंदर पार अमेरिका में भी मंथन किया जा रहा है. इस महामारी से भारत के सामने खड़ी चुनौतियों और उसके निदान के लिए आगामी 10 अप्रैल को अमेरिका के सिलिकॉन वैली में हैकाथन का आयोजन किया जाएगा. 10 अप्रैल को कोड-19 के नाम से कोरोना वायरस महामारी से पैदा हुई चुनौतियों से निबटने के लिए करीब 72 घंटे का एक फाउंडेशन की ओर से ऑनलाइन सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. इसमें करीब 3,000 से अधिक रिसर्चर और थिंकर हिस्सा लेंगे.

फाउंडेशन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस हैकाथॉन में 3,000 से अधिक रिसर्चर और विचारक शिरकत करेंगे. इस विचार-विमर्श से जो भी परिणाम सामने आयेगा, उससे भारत के समक्ष कोविड-19 के मौजूदा दौर में और उसके बाद के समय में आने वाली चुनौतियों से पार पाने में मदद मिलेगी.

मोटवानी जडेजा फाउंडेशन की संस्थापक आशा जडेजा मोटवानी ने कहा कि कोरोना वायरस भारत के सामने बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है. किसी भी नये संकट में नये विचारों और उसके निदान की रणनीति की जरूरत होती है. इसलिए यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम मिलकर नये विचारों और निदान के साथ आगे आएं.’

आशा जडेजा ने कहा कि यह प्रतिस्पर्धा 10 अप्रैल गुड फ्राइडे को शुरू होगी और इसमें कोई अकेले या टीम के साथ भाग ले सकता है. इसके लिए भारतीय समयानुसार शाम छह बजे तक www.cod19.in इन पर साइनअप किया जा सकता है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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