ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नजर, ‘गोल्डन डोम’ की सुरक्षा जरूरत या आर्कटिक में ताकत बढ़ाने की चाल?

ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बड़े दावे ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. क्या ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चाहिए, या यह आर्कटिक क्षेत्र में ताकत बढ़ाने की रणनीति है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा और विवादित दावा किया है. उनका कहना है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड बेहद जरूरी है. इस बार ट्रंप ने इस दावे को सीधे अपनी महत्वाकांक्षी मिसाइल डिफेंस योजना ‘गोल्डन डोम’ से जोड़ दिया है.

ट्रंप के मुताबिक, 175 अरब डॉलर की यह मिसाइल सुरक्षा परियोजना अमेरिका ही नहीं, बल्कि कनाडा की सुरक्षा भी करेगी. उन्होंने यहां तक कहा कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका के नियंत्रण में होता है, तो नाटो और ज्यादा मजबूत हो जाएगा. लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई अमेरिका को ग्रीनलैंड अपने पास रखना जरूरी है, या यह दावा ज्यादा राजनीति से जुड़ा है?

क्या है ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल डिफेंस सिस्टम?

‘गोल्डन डोम’ अमेरिका की एक नई और मॉर्डन मिसाइल सुरक्षा योजना है, जिसे पिछले साल एक कार्यकारी आदेश के जरिए शुरू किया गया. ट्रंप इसे अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे एडवांस सिक्योरिटी सुरक्षा कवच बताते हैं. इस सिस्टम का मकसद हर तरह के मॉर्डन खतरे से सुरक्षा देना है, जैसे कि बैलिस्टिक मिसाइल, हाइपरसोनिक हथियार, क्रूज मिसाइल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस ड्रोन के बड़े हमले.

इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 175 अरब डॉलर बताई गई है और इसे तीन साल में पूरा करने की योजना है. ट्रंप का लक्ष्य है कि यह सिस्टम जनवरी 2029 तक पूरी तरह काम करने लगे.

इसकी कमान अमेरिकी स्पेस फोर्स के जनरल माइकल गुएटलिन के पास है. यह योजना पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की ‘स्ट्रैटेजिक डिफेंस इनिशिएटिव’ से प्रेरित है, लेकिन आज के युद्ध हालात के हिसाब से तैयार की गई है.

गोल्डन डोम कैसे काम करेगा?

इस सिस्टम की रीढ़ एक बड़ा सैटेलाइट नेटवर्क होगा, जो पूरी दुनिया में कहीं से भी मिसाइल लॉन्च होने पर तुरंत उसे पकड़ सकेगा. ये सैटेलाइट्स जमीन, समुद्र या हवा में मौजूद इंटरसेप्टर सिस्टम को जानकारी देंगे, ताकि मिसाइल को रास्ते में ही रोका जा सके. पेंटागन इसे सिस्टम ऑफ सिस्टम्स कहता है, यानी कई स्तरों पर काम करने वाला सुरक्षा ढांचा.

ट्रंप क्यों कहते हैं कि ग्रीनलैंड ‘बहुत जरूरी’ है?

ट्रंप का तर्क पूरी तरह जियोग्राफी पर आधारित है. ग्रीनलैंड आर्कटिक इलाके में है और यूरेशिया से उत्तरी अमेरिका तक जाने वाले सबसे छोटे रास्ते इसी इलाके से होकर गुजरते हैं. किसी बड़े युद्ध की सिचुएशन में लंबी दूरी की मिसाइलें इन्हीं रास्तों से आ सकती हैं.

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड चाहिए. यह उस गोल्डन डोम के लिए जरूरी है जिसे हम बना रहे हैं. दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान ट्रंप ने कहा कि केवल अमेरिका ही इस विशाल बर्फीले इलाके की रक्षा कर सकता है, इसे डेवलप कर सकता है और बेहतर बना सकता है. उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर तुरंत बातचीत की इच्छा भी जताई.

नाटो और कनाडा को लेकर भी ट्रंप का बयान

ट्रंप ने कहा कि गोल्डन डोम न सिर्फ अमेरिका, बल्कि कनाडा की सुरक्षा भी करेगा. उन्होंने यह भी जोड़ा कि कनाडा को अमेरिका के सुरक्षा कवच के लिए ज्यादा आभारी होना चाहिए. इसके साथ ही ट्रंप ने नाटो से अपील की कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका के पास होता है, तो गठबंधन और ज्यादा मजबूत और प्रभावी बन सकता है.

ग्रीनलैंड में अमेरिका पहले से क्या-क्या करता है?

असलियत यह है कि अमेरिका ग्रीनलैंड में दशकों से मौजूद है. 1951 में डेनमार्क के साथ हुए रक्षा समझौते के तहत अमेरिका को वहां मिलिट्री और देखरेख करने की पूरी अनुमति है. ग्रीनलैंड में लोकेटेड पिटुफिक स्पेस बेस (पहले थुले एयर बेस) पहले से ही मिसाइल चेतावनी और अंतरिक्ष निगरानी में अहम भूमिका निभा रहा है. आर्कटिक क्षेत्र में इसकी लोकेशन मिसाइल ट्रैकिंग के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका चाहे, तो वह मौजूदा समझौतों के तहत और रडार, सेंसर या रक्षा सिस्टम वहां लगा सकता है.

क्या ग्रीनलैंड का मालिक बनना सच में जरूरी है?

ज्यादातर विशेषज्ञों की राय है नहीं. Politico के मुताबिक, एक पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने कहा कि अमेरिका डेनमार्क के साथ मिलकर ज्यादा रडार, बेहतर कम्युनिकेशन सिस्टम और इंटरसेप्टर साइट्स सब कुछ बिना ग्रीनलैंड खरीदे ही बना सकता है. उनका कहना था कि अगर सच में मकसद सुरक्षा मजबूत करना होता, तो मौजूदा तरीका शुरुआत से ही गलत है.

अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ विश्लेषक टॉड हैरिसन ने कहा कि ग्रीनलैंड में गोल्डन डोम के लिए अमेरिका को जो चाहिए, उस तक पहले से पूरी पहुंच है. उन्होंने ट्रंप के इस दावे को कि मालिकाना जरूरी है, हकीकत से दूर बताया.

क्या गोल्डन डोम कहीं और भी लगाया जा सकता है?

अमेरिका के अंदर भी कई जगहों पर इस सिस्टम को लेकर स्टडी हुआ है. न्यूयॉर्क का फोर्ट ड्रम एक संभावित जगह के तौर पर सामने आया है. इसके अलावा, कनाडा में या नाटो के मौजूदा ढांचे के साथ मिलकर भी इसके हिस्से लगाए जा सकते हैं. क्योंकि गोल्डन डोम एक मल्टी लेयर्ड सिस्टम है , इसलिए इसके सभी हिस्सों का एक ही जगह होना जरूरी नहीं है.

असली मुद्दा क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप जिस तरह ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम के लिए जरूरी बता रहे हैं, उसका टेक्निकल बेस कमजोर है. अमेरिका के पास पहले से ही कानूनी अधिकार, सैन्य पहुंच और जरूरी ढांचा मौजूद है. इसलिए यह बहस ज्यादा सैन्य जरूरत की नहीं, बल्कि आर्कटिक इलाके में दबदबा, नाटो पर प्रभाव और वैश्विक राजनीति से जुड़ी दिखती है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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