Prabhat Khabar Exclusive: ‘तालिबान को जल्द सैन्य झटके लगेंगे’, NRF कमांडर रूबिन सत्तार का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

ऑस्ट्रेलिया स्थित भू-राजनीतिक विश्लेषक और अफगानिस्तान-पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ मनीष राय ने प्रभात खबर के लिए यह विशेष इंटरव्यू किया.

पिछले कुछ महीनों से उत्तरी अफगानिस्तान, खासकर बदख्शां और पंजशीर प्रांतों में तालिबान बलों पर तालिबान विरोधी गुटों, जैसे नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (NRF), अफगानिस्तान फ्रीडम फ्रंट (AFF) और हाल ही में गठित सिपाह-ए-मिहान—की ओर से लगभग रोजाना हमले किए जाने की खबरें सामने आती रही हैं.

तालिबान ने हाल के दिनों में इन अशांत इलाकों में अपनी तैनाती बढ़ाई है और प्रतिरोधी कमांडरों का पता लगाने के लिए गुप्त अभियान भी शुरू किए हैं. इन्हीं अभियानों के दौरान NRF के ऑपरेशंस कमांडर हसीब पंजशिरी, जिन्हें कोये मरकज के नाम से भी जाना जाता था, की सलांग घाटी में तालिबान के विशेष बलों द्वारा किए गए घात में मौत हो गई.

हसीब पंजशिरी के पूर्व डिप्टी कमांडर रूबिन सत्तार से अफगानिस्तान-पाकिस्तान मामलों के भू-राजनीतिक विश्लेषक मनीष राय ने बातचीत की. सत्तार वर्तमान में नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (NRF) की स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट, यूनिट 01 के कमांडर हैं.

रूबिन सत्तार

हसीब पंजशिरी की मौत के बाद कमांडर सत्तार ने तालिबान बलों के खिलाफ कई हमलों की जिम्मेदारी का दावा किया है. इनमें काबुल स्थित तालिबान के सैन्य अस्पताल पर किया गया हमला भी शामिल है.

NRF को तालिबान विरोधी सबसे बड़े प्रतिरोधी संगठनों में से एक माना जाता है इसके लड़ाकों की संख्या करीब 5,000 होने का अनुमान लगाया जाता है, जिनमें बड़ी संख्या पूर्व अफगान नेशनल आर्मी (ANA) के सैनिकों की बताई जाती है.

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सवाल 1: हसीब पंजशिरी की मौत के बाद क्या NRF उबर पाएगा?

कमांडर सत्तार: कमांडर हसीब पंजशिरी का नुकसान निश्चित रूप से सभी स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक बड़ा झटका है. हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि इतिहास में जीत की कीमत हमेशा बलिदान रही है. यह वही रास्ता है जिस पर शहीद कमांडर अहमद शाह मसूद और दर्जनों अन्य कमांडरों ने अपने प्राण न्योछावर किए.

नेशनल रेजिस्टेंस की वह विचारधारा, जिसकी स्थापना राष्ट्रीय नायक ने की थी, अपने कमांडरों के जाने से कमजोर नहीं होती. बल्कि उनके बलिदान दूसरे लड़ाकों और स्वतंत्रता की तलाश करने वालों के लिए उदाहरण बनते हैं. इससे वे दुश्मन को हराने और उत्पीड़न तथा अत्याचार को समाप्त करने के अपने संकल्प में और अधिक प्रतिबद्ध और मजबूत होते हैं.

इसलिए हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि हम पहले से अधिक मजबूत हैं और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध हैं. कमांडर हसीब पंजशिरी का रास्ता जारी रहेगा.

सवाल 2: आपके लिए हसीब पंजशिरी क्या मायने रखते थे? अहमद शाह मसूद से आपकी प्रेरणा क्या है?

कमांडर सत्तार: कमांडर हसीब पंजशिरी एक समर्पित और सम्मानित मुजाहिद थे. वे पिछले पांच वर्षों से न केवल तालिबान के खिलाफ मजबूती से लड़ते रहे, बल्कि गणराज्य के दौर में भी तालिबान के उन समर्थकों के खिलाफ संघर्ष करते रहे, जो बिजनेस सूट पहनकर उसका समर्थन करते थे.

शहीद हसीब ने उत्पीड़न और अन्याय के खिलाफ अपना संघर्ष बहुत पहले शुरू कर दिया था और अंततः इसी उद्देश्य के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया. जीत की तलाश में दृढ़ता और आत्म-बलिदान के मामले में कमांडर हसीब पंजशिरी हम सभी के लिए एक उदाहरण हैं.

जहां तक राष्ट्रीय नायक शहीद अहमद शाह मसूद की बात है, उनका व्यक्तित्व पूरी दुनिया के सामने है. उन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए एक वैश्विक महाशक्ति के खिलाफ लड़ाई लड़ी और बाद में तालिबान तथा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहीद हुए.

हमारा संघर्ष राष्ट्रीय नायक अहमद शाह मसूद की विचारधारा से प्रेरित है और अंततः हम उस रास्ते को सम्मानपूर्वक पूरा करेंगे, जो उन्होंने हमारे लिए छोड़ा है.

सवाल 3: अधिकांश कमांडरों का एक कोडनेम या उपनाम होता है। क्या आपका भी कोई उपनाम है?

कमांडर सत्तार: मेरा नाम रूबिन सत्तार है और मैं किसी छद्म नाम का इस्तेमाल नहीं करता.

रूबिन सत्तार NRF

सवाल 4: निकट भविष्य के लिए आपके क्या लक्ष्य हैं?

कमांडर सत्तार: निकट भविष्य में हमारा लक्ष्य लड़ाकों को संगठित करना और अफगानिस्तान के मध्य तथा प्रमुख प्रांतों में गुरिल्ला अभियानों का विस्तार करना है.

सवाल 5: NRF में आपका पद मार्शल है. आपकी जिम्मेदारी क्या है और आपके पास कितने लड़ाके हैं?

कमांडर सत्तार: मैं यूनिट 01 के लिए जिम्मेदार हूं. यह एक ऑपरेशनल यूनिट है, जो राजधानी और विभिन्न प्रांतों में तालिबान के विशिष्ट ठिकानों के खिलाफ अभियान चलाती है.

यूनिट 01 को शहरी गुरिल्ला सेल के रूप में संगठित किया गया है. इनका काम लक्ष्यों की पहचान करना और अभियान को अंजाम देना है.

सवाल 6: काबुल में तालिबान के सैन्य अस्पताल पर हमले जैसे हालिया हमले क्या सिर्फ हसीब पंजशिरी की मौत का बदला हैं?

कमांडर सत्तार: काबुल में हमारे अभियानों का उद्देश्य तालिबान को चुनौती देना और उसके विभिन्न ढांचों को निशाना बनाना है. हम अपने अभियानों की योजना विस्तृत आकलन के आधार पर बनाते हैं और नागरिकों के हताहत होने से रोकने के लिए हर संभव सावधानी बरतते हैं.

तालिबान अपनी मौजूदगी और जमीन पर वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश करता है. इसके बावजूद प्रतिरोधी बल विभिन्न स्थानों पर सक्रिय मौजूदगी बनाए हुए हैं और अपनी योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं.

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सवाल 7: चीन जैसे बड़े निवेशकों को लेकर आपकी क्या राय है? पाकिस्तान से कुछ तालिबान विरोधी समूहों को समर्थन मिलने की खबरों पर आप क्या कहेंगे?

कमांडर सत्तार: निवेश और आर्थिक विकास हमारे समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. हम ऐसी हर गतिविधि का समर्थन करते हैं, जो वास्तव में हमारे लोगों के कल्याण और बेहतर जीवन में योगदान देती हो.

हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में—जब अफगानिस्तान पर एक आतंकवादी संगठन का शासन है और उसके राजस्व तथा खर्चों को लेकर पारदर्शिता का अभाव है—ऐसे संगठन के साथ निवेश या किसी तरह का जुड़ाव किसी भी देश के हित में नहीं है.

तालिबान उत्पीड़न और आतंक पर आधारित संगठन है. वह मानवाधिकारों को अस्वीकार करता है, महिलाओं को शिक्षा और स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित करता है और उसने अफगानिस्तान को आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह में बदल दिया है.

जहां तक रेजिस्टेंस फ्रंट को अंतरराष्ट्रीय समर्थन की बात है, नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट अफगान समाज के विभिन्न हिस्सों से जुड़े लड़ाकों का एक जमीनी गठबंधन है, जो अपनी मातृभूमि की मुक्ति के लिए संघर्ष कर रहा है.

किसी विदेशी देश का फ्रंट पर नियंत्रण नहीं है. इसके आदर्श और उद्देश्य स्पष्ट हैं. इसके अलावा, नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से पड़ोसी देशों से लगातार यह अपील करता रहा है कि वे आतंकवाद के खिलाफ अफगान जनता के संघर्ष और आतंकवादियों के नियंत्रण से मुक्त होने की उसकी कोशिश का समर्थन करें.

निस्संदेह, अफगानिस्तान में इस आतंकवादी संगठन का प्रभुत्व और मौजूदगी किसी भी देश के हित में नहीं है. उसका चरमपंथी विचारधारा वाला मॉडल, जो वर्तमान में जड़ें जमा रहा है और फैल रहा है, अंततः अफगानिस्तान को एक बार फिर ऐसा लॉन्चपैड बना सकता है, जहां से आतंकवाद पूरे क्षेत्र और दुनिया के अन्य हिस्सों में फैल सकता है.

Manish Rai interview Rubin Sattar of NRF, Afghanistan

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लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, Geopolitical Analyst, UPSC Educator और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं (जैसे Pratiyogita Darpan) में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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