तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के सभी विवादों, जिसमें कश्मीर का मुद्दा भी शामिल है, को बातचीत के जरिए और संयुक्त राष्ट्र चार्टर तथा संबंधित प्रस्तावों के दायरे में सुलझाया जाना चाहिए. एर्दोगन जब यह बात कह रहे थे, उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी UN मुख्यालय में मौजूद थे.
UN में एर्दोगन ने क्या कहा?
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक एर्दोगन ने अपने संबोधन में कहा कि दक्षिण एशिया में विवादों का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए. उन्होंने कश्मीर को भी इसी संदर्भ में शामिल किया. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से अलग-अलग रुख रहे हैं.
तुर्की के राष्ट्रपति इससे पहले भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से कश्मीर का मुद्दा उठा चुके हैं. 2025 में भी उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और सीजफायर का जिक्र करते हुए कश्मीर मुद्दे के समाधान की बात कही थी. 2019 में उनके बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी.
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कश्मीर पर भारत का क्या रुख है?
भारत लगातार जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा बताता रहा है और पाकिस्तान के साथ लंबित मुद्दों को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाने की बात करता है. नई दिल्ली तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता. इसलिए एर्दोगन का UN में कश्मीर को बातचीत और UN प्रस्तावों से जोड़ना भारत के स्थापित रुख से अलग है.
एर्दोगन ने अपने भाषण में कश्मीर के अलावा गाजा की स्थिति, फिलिस्तीन को व्यापक अंतरराष्ट्रीय मान्यता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की भी मांग की. उन्होंने मौजूदा UNSC व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि 190 से ज्यादा देशों की इच्छा को पांच स्थायी सदस्यों के फैसलों के अधीन रखना उचित नहीं है.
