इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने साफ संकेत दिया कि अमेरिका फिलहाल बातचीत और कूटनीति के रास्ते आगे बढ़ना चाहता है. ट्रंप ने नेतन्याहू से साफ कहा कि हालात को संभालकर चलें. उनका कहना था कि अगर इजराइल और ईरान के बीच फिर से बड़े स्तर पर जंग छिड़ती है, तो इससे तेहरान के साथ चल रही बातचीत पटरी से उतर सकती है. साथ ही अमेरिका भी एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में और बुरी तरह से फंस सकता है, जिसे ट्रंप टालना चाहते हैं.
रविवार (7 जून) को इजरायल ने बेरूत में हिज्बुल्लाह से जुड़े ठिकानों पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने इजराइल पर मिसाइलें दाग दीं. इससे पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध का खतरा बढ़ गया. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू से कहा कि अभी और जवाबी कार्रवाई से बचें, क्योंकि ईरान के साथ बातचीत में जल्द ही कोई बड़ा समझौता हो सकता है.
ट्रंप को किस चीज की चिंता सता रही है
Axios (अमेरिकी डिजिटल न्यूज मीडिया)की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप इस मामले में काफी मुश्किल स्थिति में थे. एक तरफ वे मानते हैं कि ईरानी हमलों के जवाब में इजराइल को अपनी सुरक्षा का अधिकार है, लेकिन दूसरी तरफ उन्हें चिंता है कि दोनों देशों के बीच लगातार हो रहे जवाबी हमले कहीं पूरे मध्य पूर्व को एक बड़े युद्ध की आग में न झोंक दें.
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ट्रंप की आपत्तियों के बावजूद नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस को साफ कर दिया कि इजराइल सीमित सैन्य कार्रवाई करेगा. इसके बाद इजराइल ने ईरान के कुछ ठिकानों को निशाना बनाया. जवाब में ईरान ने भी इजराइल पर मिसाइलों की एक और खेप दाग दी. हालांकि अमेरिका सीधे इस हमले का हिस्सा नहीं बना, लेकिन अमेरिकी सेना ने इजराइल की मदद करते हुए ईरान से दागी गई कई मिसाइलों को हवा में ही रोकने में सहयोग किया.
ट्रंप ने किया नेतन्याहू को फोन
इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने एक बार फिर नेतन्याहू से फोन पर बात की और उनसे बड़े हमले की योजना रोकने को कहा. रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप नहीं चाहते थे कि हालात और बिगड़ें. आखिरकार नेतन्याहू इस बात पर राजी हो गए कि अगर ईरान आगे कोई नया हमला नहीं करता, तो इजराइल भी हमले नहीं करेगा. इससे क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिश की गई.
