Desi Liquor Rate In Pakistan :  पाकिस्तान में देसी शराब का पव्वा भारत से बहुत महंगा

Desi Liquor Rate In Pakistan: पाकिस्तान में शराब पीना न केवल सामाजिक और कानूनी रूप से खतरनाक है, बल्कि यह काफी महंगा भी पड़ता है. शौकीन लोगों को इसके लिए अपनी जेब बहुत ढीली करनी पड़ती है. देसी पव्वा किस कीमत पर लोगों को पड़ोसी देश में मिलता है? आइए जानते हैं यहां.

Desi Liquor Rate In Pakistan : भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में शराब की बिक्री और इस्तेमाल पर सख्त कानून लागू हैं. आम लोगों के लिए शराब खरीदना और पीना गैरकानूनी है. केवल गैर-मुस्लिम समुदायों और कुछ चुनिंदा क्लबों या होटलों को ही इसकी सीमित अनुमति सरकार के द्वारा प्रदान की गई है. इसके बावजूद पाकिस्तान में देसी शराब और वहां बनी विदेशी शराब की खपत कम नहीं है. शौकीन लोग जेब ढीली करके वहां झूमते हैं. पाकिस्तानी चोरी-छिपे शराब खरीदते और पीते हैं, जिसके चलते इसका दाम भी ज्यादा होता है. खासकर देसी शराब का पव्वा महंगे दामों पर वहां बिकता है.

एक छोटा क्वार्टर कितने में मिलता है पाकिस्तान में?

पंजाब एक्साइज एंड टैक्सेशन एक्ट के तहत मीडिया में रिपोर्ट आई है. इसके अनुसार, पाकिस्तान में बनी विदेशी शराब पर 600 पाकिस्तानी रुपये प्रति गैलन स्टिल-हेड ड्यूटी लगाई जाती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान में आधा लीटर की शराब की बोतल पर 42.50 PKR का वेंड शुल्क भी लगता है. इसका मतलब है कि एक छोटा क्वार्टर (180–200ml) टैक्स और शुल्क मिलाकर लगभग 500–600 PKR यानी करीब 1,500–2,000 भारतीय रुपये में पाकिस्तान में बिकता है.

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शराब के शौकीनों को क्यों लगा झटका?

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ साल पहले पाकिस्तान में देसी बियर का एक कैन 300–500 PKR में, वोडका 2,000–2,500 PKR में और लोकल व्हिस्की लगभग 4,000 PKR में शराब के शौकीनों को मिलता था. देश की बिगड़ती आर्थिक हालत, महंगाई और बढ़ते टैक्स के कारण अब विदेशी वोडका की कीमत 10,000 PKR से ऊपर जबकि ब्रांडेड व्हिस्की 15–20 हजार PKR तक पहुंच गई है. इस बढ़ी कीमत से शराब के शौकीनों को बड़ा झटका लगा है. उन्हें शौक पूरा करने के लिए बहुत ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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