ग्रीनलैंड में अलर्ट: डेनमार्क ने बढ़ाई सेना की तैयारी, अमेरिकी हमले की आशंका के बीच जवान तैनात

डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपने सैनिकों की तैयारी बढ़ा दी है. अमेरिकी हमले की अटकलों के बीच सेना असली गोलियों के साथ सतर्क है. नौसेना, वायुसेना और थलसेना सभी तैनात हैं. NATO के यूरोपीय सहयोगी भी इसमें शामिल हैं.

डेनमार्क ने ग्रीनलैंड में अपनी सेना की सतर्कता बढ़ा दी है. ऐसा अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की संभावना को देखते हुए किया गया. डेनमार्क की सेना को आदेश दिया गया कि जरूरत पड़ने पर वे असली गोलियों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार रहें. यह जानकारी डेनिश मीडिया ने दी है.

टॉप कमांड से आदेश

जनवरी के बीच तक डेनमार्क की सैन्य टॉप कमान ने यह निर्देश जारी किया. आदेश में कहा गया कि ग्रीनलैंड की रक्षा योजनाओं को तुरंत लागू करने के लिए सेना पूरी तरह तैयार रहे. डेनमार्क से ग्रीनलैंड की ओर लोगों और इक्विपमेंट्स को ले जाने वाली सिविल और सैन्य उड़ानों की भी रिपोर्ट मिली. DR के सूत्रों के अनुसार, यह सब तैयारी स्थिति बिगड़ने की संभावना के मद्देनजर की गई थी.

हालांकि डेनमार्क के नेता और विपक्षी दल मानते थे कि अमेरिका हमला करने वाला नहीं है, फिर भी उन्होंने सबसे कठिन परिस्थितियों के लिए तैयारी कर ली थी. बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जनवरी 21 को सैन्य कार्रवाई से इंकार कर दिया, जिससे तुरंत स्थिति शांत हुई.

असली गोलियों के साथ तैयारी

यह कार्रवाई आर्कटिक एंड्योरेंस नामक मल्टी-स्टेज सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा थी. इसके तहत जरूरत पड़ने पर और सैनिक तैनात किए जा सकते हैं. आदेश में पुष्टि की गई कि डेनमार्क की सेना असली KUP गोलियों के साथ तैनात है, ताकि अगर स्थिति बिगड़े तो तुरंत जवाब दिया जा सके.

हालांकि यह अभ्यास पहले से तय था, हाल की घटनाओं के चलते इसे जल्दी लागू किया गया. लेकिन इसके पीछे का खास कारण अभी पब्लिकली नहीं किया गया.

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सभी एरिया में सैनिक तैनाती

सतर्कता बढ़ने के बाद से आर्कटिक एंड्योरेंस लगातार चल रहा है. डेनमार्क की सेना ने ग्रीनलैंड में भारी बल तैनात किए हैं, जिनमें बख्तरबंद पैदल सेना और विशेष ट्रेनिंग वाले सैनिक शामिल हैं.

नौसेना के जहाज ग्रीनलैंड के आस-पास पानी में तैनात हैं, जबकि एक फ्रिगेट उत्तर अटलांटिक के बर्फ रहित हिस्सों में ऑपरेशन कर रहा है. एयरफोर्स ने सैनिक और इक्विपमेंट्स वहां पहुंचाए और F-35 लड़ाकू विमान ने पहली बार ग्रीनलैंड के ऊपर गश्त की.

इस ऑपरेशन में यूरोपीय NATO देशों की मदद भी शामिल है, जिनमें स्वीडन, नॉर्वे, फ़िनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड और यूके शामिल हैं.

राजनीतिक समर्थन

सूत्रों के अनुसार, डेनमार्क में सभी पार्टियों का मानना है कि ग्रीनलैंड की रक्षा जरूरी है. इसका मकसद अमेरिका से मुकाबला करना नहीं है, बल्कि तैयार रहना और किसी भी बढ़ते तनाव पर राजनीतिक कीमत बढ़ाना है.

प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने भी कहा कि अमेरिकी बयान ने स्थिति को अनिश्चित बना दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सैन्य कार्रवाई की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की है. इसलिए हम भी इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में, ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को हमारा क्षेत्र कहा. उन्होंने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चाहता है लेकिन इसे हथियार का इस्तेमाल करके हासिल नहीं करेगा. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आप हां कह सकते हैं, हम आभारी होंगे. या आप ना कह सकते हैं, और हम इसे याद रखेंगे.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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