Country Sinking in Sea : समुद्र में डूब जाएगा ये देश, लॉटरी सिस्टम से बचेगी लोगों की जान

Country Sinking in Sea : तुवालु समुद्र में डूबने वाला है. वीजा योजना 2023 की खबर इसी से संबंधित है. यह योजना ऑस्ट्रेलिया और तुवालु के बीच हुए एक समझौते का हिस्सा है, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया तुवालु की सैन्य और समुद्री जलस्तर बढ़ने से रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. जानें पूरी कहानी जो बहुत ही रोचक है.

Country Sinking in Sea : तुवालु देश की एक तिहाई से अधिक आबादी ने ऑस्ट्रेलिया की वीजा योजना के तहत आवेदन किया है. इसकी कहानी बहुत ही रोचक और डरावनी है. दरअसल, यह योजना उन लोगों के लिए शुरू की गई है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित हैं और अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं. तुवालु एक छोटा द्वीपीय देश है, जो दक्षिणी प्रशांत महासागर में हवाई और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्थित है. यहां लगभग 10,000 लोग रहते हैं, जो कई छोटे द्वीपों और टापुओं पर बसे हैं. तुवालु की भूमि समुद्र तल से केवल छह मीटर या उससे कम ऊंचाई पर है, जिससे इसका अस्तित्व खतरे में है.

लॉटरी सिस्टम से चुने गए नागरिकों को वीजा दिया जाएगा

16 जून को ऑस्ट्रेलिया ने एक विशेष वीजा योजना की शुरुआत की, जिसकी आवेदन प्रक्रिया लगभग एक महीने चलेगी. यह योजना जलवायु परिवर्तन से प्रभावित तुवालु के नागरिकों के लिए शुरू की गई है और इसे अपनी तरह की पहली पहल माना जा रहा है. इसके तहत जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच लॉटरी प्रणाली के माध्यम से चुने गए 280 तुवालु नागरिकों को वीजा दिया जाएगा. इन्हें ऑस्ट्रेलिया पहुंचते ही स्थायी निवास प्राप्त होगा. साथ ही उन्हें वहां काम करने का अधिकार, सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी.

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वॉन्ग ने क्या कहा?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वीजा योजना के तहत अब तक 4,000 से अधिक तुवालु नागरिक आवेदन कर चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वॉन्ग ने कहा कि फालेपिली मोबिलिटी योजना हमारे साझा लक्ष्य को पूरा करती है, जिसमें तुवालुवासियों को सम्मानजनक तरीके से रहने, काम करने और पढ़ाई करने का अवसर दिया जा रहा है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

2050 तक आधे से ज्यादा हिस्सा समुद्री लहरों से डूबेगा

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, तुवालु के प्रधानमंत्री फेलेटी टेओ ने बताया कि 2050 तक देश का आधे से अधिक हिस्सा बार-बार समुद्री लहरों से डूबने लगेगा, जबकि 2100 तक 90% हिस्सा जलमग्न रहेगा. तुवालु की राजधानी फोंगाफाले, जो मुख्य एटोल फुनाफूती का सबसे बड़ा और सबसे घनी आबादी वाला द्वीप है, कुछ जगहों पर केवल 20 मीटर (लगभग 65 फीट) चौड़ा है, जो किसी रनवे जैसा दिखता है. यह स्थिति देश के अस्तित्व पर गंभीर खतरा बन चुकी है.

तुवालु के प्रधानमंत्री टेओ ने इस महीने फ्रांस के नीस शहर में हुई संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन में इस बात का जिक्र किया. उन्होंने कहा, “आप खुद को मेरी जगह रखकर सोच के देखिए…एक प्रधानमंत्री के रूप में मुझे अपने लोगों की बुनियादी जरूरतों और विकास की योजनाओं के बारे में सोचना होता है, साथ ही मुझे एक डराने वाला और चिंता पैदा करने वाला भविष्य भी नजर आ रहा है. प्रधानमंत्री ने 12 जून को कहा, “तुवालु के अंदर कहीं और जाकर बसने का कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि हमारा देश पूरी तरह सपाट है. यहां न तो कोई ऊंची जमीन है और न ही कहीं अंदर की ओर जाने की जगह है.”

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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