शेख हसीना के भारत में रहने को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच जारी तनाव के बीच बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने पहली बार प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए “अनुकूल माहौल” बनाने की जरूरत है. दरअसल सोमवार (10 अगस्त ) रहमान ने भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से मुलाकात की. मीटिंग में रहमान ने दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने जोर दिया. यह रहमान की भारतीय उच्चायुक्त के साथ पहली मुलाकात थी.
हसीना के प्रत्यर्पण की मांग पर भी जोर
बांग्लादेश की ओर से भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग लगातार की जा रही है. हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में सरकार गिरने के बाद भारत आ गई थीं. बांग्लादेश में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई चल रही है और नवंबर में उन्हें मौत की सजा सुनाए जाने की बात सामने आई थी.
भारत ने शेख हसीना के ऑनलाइन कार्यक्रम से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था ने आयोजित किया था. भारत सरकार का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं था और कार्यक्रम में व्यक्त किए गए किसी भी विचार का सरकार ने समर्थन नहीं किया.
हसीना के बयान से फिर बढ़ा विवाद
शेख हसीना ने भारत से ऑनलाइन ऑडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पहली बार मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि वह दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटने के लिए तैयार हैं. उन्होंने यह भी माना कि वापसी पर उन्हें जेल या मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है. हसीना के बयान के बाद बांग्लादेश ने कड़ा विरोध जताया और कहा कि इससे दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिशें प्रभावित हुई हैं.
भारत ने सकारात्मक रुख का दिया भरोसा
भारतीय उच्चायोग के मुताबिक, दिनेश त्रिवेदी ने बैठक में भारत की ओर से बांग्लादेश के साथ “सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्य की ओर देखने वाले” तरीके से काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई. दोनों देशों के बीच बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब शेख हसीना का मुद्दा द्विपक्षीय संबंधों में सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है.
बातचीत से सुलझ सकते हैं विवाद
मीटिंग से पहले भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बातचीत को समाधान का रास्ता बताया. उन्होंने कहा कि जब दोनों देशों के नेता आमने-सामने बैठकर बात करते हैं तो कई समस्याओं का समाधान निकल आता है. उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों के लोग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और समस्याओं का समाधान निश्चित रूप से बातचीत के जरिए निकलेगा.
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