Balendra Shah: नेपाल एक हिंदू बहुल देश है और वहां भगवान राम के प्रति गहरी आस्था है. बालेन खुद मधेशी समुदाय से आते हैं और उनका ताल्लुक उसी तराई क्षेत्र से है जहां जनकपुर स्थित है. जानकारों का कहना है कि शपथ के लिए राम नवमी का दिन चुनना और जनकपुर से कैंपेन शुरू करना एक बड़ा प्रतीकात्मक संदेश है. सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर काफी चर्चा है.
पुरानी राजनीति से अलग ‘नया हिंदुत्व’
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, JNU के रिटायर्ड प्रोफेसर एस.डी. मुनि ने कहा कि बालेन का यह कदम राजशाही को वापस लाने की कोशिश नहीं है, बल्कि देश के हिंदुओं की आस्था का सम्मान है. उनके समर्थक युवा हैं और वे राजशाही के खिलाफ हैं. वहीं, प्रोफेसर संजय भारद्वाज का कहना है कि बालेन यह साफ करना चाहते हैं कि वे पिछले नेताओं (प्रचंड और ओली) की तरह धर्म से दूरी नहीं बना रहे. वे एक ऐसे ‘हिंदुत्व’ की बात कर रहे हैं जो राजाओं के जमाने से अलग है, जहां राजा खुद को भगवान विष्णु का अवतार बताते थे.
भारत के लिए क्या है इसका मतलब?
प्रोफेसर मुनि का कहना है कि बालेन की इस राजनीति को भारत के ‘हिंदुत्व’ से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. नेपाल अपनी एक अलग धार्मिक और राष्ट्रीय पहचान बनाना चाहता है. बालेन ने पहले भारत के ‘अखंड भारत’ मैप के जवाब में ‘ग्रेटर नेपाल’ का मैप भी दिखाया था, जिसमें उत्तराखंड, यूपी और बिहार के कुछ हिस्से शामिल थे. यानी, वे अपनी राजनीति को पूरी तरह से नेपाली राष्ट्रवाद के इर्द-गिर्द रख रहे हैं.
इंजीनियर और रैपर से पीएम तक का सफर
बालेन शाह सिर्फ एक नेता नहीं हैं, वे एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं और उन्होंने भारत में भी पढ़ाई की है. वे एक मशहूर रैपर भी रहे हैं, जिन्होंने अपने गानों के जरिए भ्रष्टाचार पर जमकर चोट की थी. इसी वजह से वे नेपाल की ‘जेन-जी’ (Gen Z) यानी युवाओं के बीच बेहद पॉपुलर हैं. 2022 में उन्होंने काठमांडू के मेयर पद का चुनाव एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 61,000 वोटों के भारी अंतर से जीता था.
चुनावों में किया क्लीन स्वीप
5 मार्च को हुए चुनावों में बालेन की पार्टी RSP ने सबको चौंका दिया. 275 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा में RSP ने 182 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया है. बालेन ने खुद पूर्व पीएम के.पी. शर्मा ओली को करीब 50,000 वोटों से हराया. नेपाल के चुनावी सिस्टम में 165 सदस्य सीधे चुने जाते हैं और 110 प्रपोशनल सिस्टम से आते हैं. बालेन की पार्टी ने सीधे चुनाव में 125 और PR से 57 सीटें जीतीं.
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27 मार्च को होगी ताजपोशी
पार्टी के फैसले के मुताबिक, बालेन शाह प्रधानमंत्री बनेंगे और पूर्व पत्रकार रवि लामिछाने पार्टी के अध्यक्ष बने रहेंगे. 26 मार्च को नए सांसदों की शपथ होगी और उसी दिन बालेन को संसदीय दल का नेता चुना जाएगा. इसके अगले दिन यानी 27 मार्च को वे देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. वे नेपाल के इतिहास के पहले मधेशी प्रधानमंत्री होंगे.
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