इस्लामाबाद: पाकिस्तान के एक आतंकवाद-निरोधी अदालत ने मुंबई हमले के मुख्य आरोपी लश्कर-ए-तयबा कमांडर जकिउर रहमान लख्वी के वकील के अनुपस्थित रहने के कारण आज सुनवायी के दौरान एक मुख्य गवाह के साथ जिरह को रोक दिया.
रावलपिंडी की अदालत के न्यायाधीश चौधरी हबीब-उर रहमान ने लख्वी के वकील ख्वाजा हैरिस अहमद के आवेदन के आधार पर मामले की सुनवायी चार मई तक के लिए स्थगित कर दी है.बचाव पक्ष के वकील को चार निजी गवाहों के साथ जिरह करना था. इन चारों गवाहों में से एक ने नवंबर 2008 में मुंबई पर हुए आतंकवादी हमलों में इस्तेमाल की गई नौकाओं को खरीदने वाले की पहचान की है.
सूत्रों ने कहा कि अहमद ने अपने आवेदन में अदालत को सूचित किया कि वह कुछ ‘घरेलू कारणों’ से आज की सुनवायी में शामिल नहीं हो सकेंगे.अदालत ने आवेदन को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवायी अगले शनिवार तक स्थगित कर दी है. सुनवायी के बाद संघीय जांच एजेंसी के मुख्य अभियोजक चौधरी जुल्फिकार अली ने पीटीआई को बताया कि बचाव पक्ष के वकील को चारों गवाहों के साथ जिरह 13 अप्रैल को हुई पिछली सुनवायी के दौरान ही पूरा कर लेना चाहिए था.
उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत अजीब है कि बचाव पक्ष के वकील गवाहों के साथ जिरह में देर कर रहे हैं. यह सुनवायी का मजाक उड़ाना और जानबूझ कर देरी करना है.’’ उन्होंने कहा कि कराची से रावलपिंडी आए गवाहों को बवाच पक्ष के वकीलों के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. पिछली सुनवायी के दौरान गवाहों में से एक ने आरोपी शाहिद जमील रियाज की पहचान की थी और कहा था कि उसी ने आतंकवादियों के लिए नाव खरीदे थे. दूसरे गवाह ने न्यायाधीश को बताया था कि उसने आरोपी को नौकाओं के मोटर बेचे थे.
