स्वत: नष्ट हो जाने वाले उपकरणों के लिए अमेरिकी सेना का फंड

वाशिंगटन : अमेरिकी सेना ऐसी तकनीक विकसित करने पर लाखों डॉलर खर्च रही है, जो युद्ध के मैदान में खुद को स्वत: ही नष्ट कर लेती है. यह ठीक उसी तरह से होगी, जिस तरह टीवी शो ‘मिशन इंपॉसिबल’ में टेप रिकॉर्डर खुद ही धुएं में बदल जाता था. पेंटागन की हाईटेक अनुसंधान शाखा ने […]

वाशिंगटन : अमेरिकी सेना ऐसी तकनीक विकसित करने पर लाखों डॉलर खर्च रही है, जो युद्ध के मैदान में खुद को स्वत: ही नष्ट कर लेती है. यह ठीक उसी तरह से होगी, जिस तरह टीवी शो ‘मिशन इंपॉसिबल’ में टेप रिकॉर्डर खुद ही धुएं में बदल जाता था.

पेंटागन की हाईटेक अनुसंधान शाखा ने पिछले दो माह में 1.7 करोड़ डॉलर से ज्यादा के अनुबंध किए हैं, ताकि माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और दूसरे उपकरणों को दुश्मन के हाथों में पड़ने से रोका जा सके.

कंपनियों को ऐसे ‘अस्थायी’ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तैयार करने के लिए कहा गया है जिन्हें या तो दूर से नष्ट किया जा सके या फिर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जा सके.मिशन:इंपॉसिबल की 1960 के दशक की श्रृंखला में मुख्य जासूस को हमेशा एक टेप रिकॉर्डर पर गोपनीय सूचनाएं मिलती हैं. ‘यह टेप पांच सेकंड के भीतर ही खुद को नष्ट कर लेता था.’

अब डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी :डीएआरपीए: रिकॉर्डर के 21वीं सदी की प्रति तैयार करने के लिए आर्थिक मदद दे रही है. यह अस्थायी रुप से प्रोग्राम किए जा सकने वाले संसाधनों के प्रोग्रम की प्रयोगात्मक परियोजनाओं में सहयोग दे रही है.

पिछले माह जारी डीएआरपीए के अनुबंध दस्तावेज के अनुसार, अमेरिकी बलों में छोटे एवं परिष्कृत इलेक्ट्रॉनिक्स का प्रयोग रेडियो से लेकर हथियारों तक में बढ़ा है लेकिन ‘‘हर उपकरण का पता लगाना और उसे बरामद करना लगभग असंभव है.’’ अमेरिका को उसकी तकनीकी दक्षता खोने के खतरे के प्रति सावधान करते हुए इसमें कहा गया, ‘‘इलेक्ट्रॉनिक उपकरण युद्ध के मैदान में जहां-तहां बिखरे पड़े मिलते हैं. ये दुश्मन के हाथ में पड़ सकते हैं और वह इसका अध्ययन कर सकता है या दोबारा इस्तेमाल भी कर सकता है.’’ नए प्रोग्राम का उद्देश्य ऐसे तंत्र बनाना है, ‘‘जो नियंत्रित, संचालन योग्य तरीके से भौतिक रुप से गायब हो सकें.’’ इससे ये उपकरण दुश्मन के लिए उपयोगी नहीं रहेंगे.

डीएआरपीए अपनी महत्वाकांक्षी खोजों के लिए पहचानी जाती है. ये खोजें सैन्य और असैन्य क्षेत्रों दोनों के लिए ही फायदेमंद रही हैं. इनमें इंटरनेट और जीपीएस नेविगेशन सिस्टम का निर्माण भी शामिल है.

प्रोग्राम की प्रबंधक एलिशिया जैक्सन ने कहा कि इन उपकरणों को या तो कमांडर द्वारा भेजे जाने वाले सिग्नल से नष्ट किया जा सकेगा या एक निश्चित तापमान समेत कुछ ‘नियत पर्यावरणीय स्थितियां’ उत्पन्न कर.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >