वियना : ऐतिहासिक ईरान परमाणु संधि को लागू करने की दिशा में राजनयिकों ने अगले कदम पर काम शुरु कर दिया है. इस बीच ईरान के राष्ट्रपति ने इसे तेहरान की मांग के आगे पश्चिमी शक्तियों का ‘‘आत्समर्पण’’ करार दिया है.हालांकि अमेरिका ने कल इस बयान को खारिज किया और ईरान से इस संधि को पालन करने का आग्रह किया.
24 नवंबर को हुई संधि के तहत तेहरान ने अपने अपने परमाणु कार्यक्रम पर पावंदी लगाने पर सहमति जतायी है जिसके बदले उसे छह माह तक शुरुआती रियायत दी जायेगी और यदि दोनों पक्ष सही दिशा में आगे बढते हैं तो संधि को स्थायी रुप दिया जा सकता है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी :आईएईए: संधि के के अनुपालन की निगरानी करेगा.
दो राजनयिकों के मुताबिक इसकी भूमिका की मंजूरी के लिए 35 देशों वाली आईएईए की बोर्ड की बैठक 24 जनवरी को होने वाली है. इन दोनों राजनयिकों ने ये जानकारी नाम न जाहिर करने की शर्त पर दी क्योंकि ये दोनों आईएईए की आधिकारिक घोषणा से पूर्व तिथि का खुलासा करने के लिए अधिकृत नहीं हैं.
ईरान के अधिकारी इस संधि को देश के लिए एक फायदेमंद सौदा बता रहे हैं और जिसके बदले में उन्हें रियायत दी जाएगी। लेकिन उनका कहना है यह न्यूनतम परमाणु राहत है.
ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी ने कल इस संधि पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वे इस संधि के प्रयासों को लेकर दृढ़ हैं लेकिन संधि की निंदा करने वाले कटटरपंथियों का यह दावा है कि यह संधि ईरान के परमाणु अधिकारों पर अतिक्रमण है.
