देवयानी ने अमेरिका से वीजा जालसाजी मामला निरस्त करने की मांग की

न्यूयार्क : भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े ने अमेरिका की एक अदालत से कहा है कि वह उनके खिलाफ वीजा जालसाजी मामला में आरोप रद्द कर दे और किसी खुली गिरफ्तारी वारंट को निरस्त कर दे क्योंकि वह राजनयिक छूट से कवचबद्ध हैं और अमेरिका में उनके खिलाफ कोई आपराधिक अभियोजन नहीं हो सकता. देवयानी के […]

न्यूयार्क : भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े ने अमेरिका की एक अदालत से कहा है कि वह उनके खिलाफ वीजा जालसाजी मामला में आरोप रद्द कर दे और किसी खुली गिरफ्तारी वारंट को निरस्त कर दे क्योंकि वह राजनयिक छूट से कवचबद्ध हैं और अमेरिका में उनके खिलाफ कोई आपराधिक अभियोजन नहीं हो सकता.

देवयानी के वकील डैनियल आशर्क ने कल न्यूयार्क के सदर्न डिस्ट्रक्टि में राजनयिक छूट के आधार पर उनके खिलाफ मामला रद्द करने और उनके खिलाफ किसी भावी कानूनी कार्रवाई को निरस्त करने के प्रस्ताव के समर्थन में और उनकी तरफ से एक मेमोरंडम ऑफ लॉ दायर किया.

आर्शक ने याचिका में कहा, डॉ. खोबरागड़े अब औपचारिक रुप से इस अदालत में तत्काल कार्यवाही रद्द करने, उनकी रिहाई की शर्तों को निरस्त करने, और जमानत की शर्तें हटाने के लिए आग्रह करती हैं क्योंकि अमेरिका में आपराधिक अभियोजन से उन्हें छूट है क्योंकि अमेरिका सरकार की ओर से उन्हें न्यायक्षेत्र छोड़ने की छूट दी गई है.

भारतीय राजनयिक के खिलाफ आरोप और कार्यवाही रद्द करने, देवयानी की 12 दिसंबर की प्राथमिक पेशी के दौरान अदालत की तरफ से लगाई गई किसी और तमाम जमानत शर्तें निरस्त करने और उन्हें उनकी तरफ से दी गई जमानत या मुचलका से मुक्त करने के लिए आर्शक अदालत से आदेश का आग्रह कर रहे हैं.

उन्होंने मामले के संबंध में देवयानी के खिलाफ कोई खुले गिरफ्तारी वारंट या प्रत्यर्पण के आग्रह भी निरस्त करने का अनुरोध किया क्योंकि वे भी कानूनी रुप से अमान्य कृत्य (नल्लिटीज) हैं क्योंकि मौजूदा कार्यवाही निरस्त किए जाने योग्य है. आर्शक 31 जनवरी को या उससे पहले जज शिरा शेंडलिन के आदेश पर व्यवस्था की आग्रह कर रहे हैं.

देवयानी के खिलाफ आपराधिक आरोप लगाने वाले मैनहटन के शीर्ष संघीय अभियोजक प्रीत भराड़ा ने कहा कि आर्शक की ओर से पेश मोशन पर अभी कोई टिप्पणी नहीं है.फाइलिंग में कहा गया है कि देवयानी के राजनयिक दर्जे के चलते भारतीय राजनयिक की गिरफ्तारी और आरोप के वक्त उनपर अदालत का निजी न्यायक्षेत्र नहीं बनता था, लेकिन अब भी मामला निरस्त करने के उनके मोशन पर व्यवस्था देने का उसका (अदालत का) विषय सामग्री न्यायक्षेत्र है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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