देवयानी ने अर्जी पर जारी चर्चा सार्वजनिक करने को लेकर भरारा की निंदा की

न्यूयार्क : वरिष्ठ भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े ने अपने खिलाफ वीजा धोखाधड़ी मामले को सुलझाने के लिए अर्जी पर जारी चर्चा का सार्वजनिक तौर पर खुलासा करने के लिए अमेरिकी अटॉर्नी प्रीत भरारा की निंदा की है और कहा है कि यह ‘‘परेशान करने वाला सुनियोजित कदम’’ है जिससे स्थिति और बिगड़ेगी. देवायानी ने कहा […]

न्यूयार्क : वरिष्ठ भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े ने अपने खिलाफ वीजा धोखाधड़ी मामले को सुलझाने के लिए अर्जी पर जारी चर्चा का सार्वजनिक तौर पर खुलासा करने के लिए अमेरिकी अटॉर्नी प्रीत भरारा की निंदा की है और कहा है कि यह ‘‘परेशान करने वाला सुनियोजित कदम’’ है जिससे स्थिति और बिगड़ेगी.

देवायानी ने कहा कि दोनों पक्ष अर्जी पर चर्चाओं को सार्वजनिक नहीं करने पर सहमत हुए थे। देवायानी के वकील डेनियल अरशक ने भरारा को एक मजबूत जवाब दिया है जिसने मजिस्ट्रेट जज सारा नेटवर्न को पत्र लिखकर कहा था कि उन्होंने उचित मापदंडों का उल्लेख किया है जो मुद्दे का समाधान कर सकते हैं.अरशक ने कहा, ‘‘हम केवल यही सोच सकते हैं कि उस समझौते का उल्लंघन परेशान करने वाला सुनियोजित कदम है.’’

देवयानी ने अपने खिलाफ मामले में अभियोग दायर करने की समयसीमा 13 जनवरी तय होने के मद्देनजर उसे यह कहते हुए एक महीने बढ़ाने का अनुरोध किया था कि तिथि का ‘‘आसन्न दबाव’’ पक्षों के बीच की अर्थपूर्ण चर्चा की क्षमता को प्रभावित कर रहा है.

यद्यपि देवयानी की अर्जी का अभियोजन ने विरोध किया है.भारत देवयानी खोबरागड़े के खिलाफ मामले को वापस लेने और 39 वर्षीय देवायानी की गत 12 दिसम्बर को गिरफ्तारी के बाद उनके कपड़े उतारकर तलाशी लेने और उन्हें अपराधियों के साथ बंद रखने के लिए अमेरिका से माफी की मांग कर रहा है.भारतीय मूल के अभियोजक भरारा के कार्यालय को देवयानी की गिरफ्तारी के 30 दिन के भीतर अभियोग दायर करना है.

अमेरिका ने गत माह कहा था कि वह देवयानी के खिलाफ मामले में आगे बढ़ रहा है और उसका मामले को वापस लेने का कोई इरादा नहीं है.गिरफ्तारी के समय देवयानी न्यूयार्क में उप महावाणिज्य दूत थीं जिसके बाद उन्हें संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में स्थानांतरित कर दिया गया था.1999 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी देवयानी को अपनी नौकरानी संगीता रिचर्ड के आवेदन में झूठी घोषणा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें ढाई लाख डालर के बांड पर रिहा किया गया था.

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