वैज्ञानिकों ने खोज निकालीं आइंस्टीन की भविष्यवाणी वाली गुरुत्वीय तरंगें

वाशिंगटन : अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उस समय खुशी की लहर पैदा हो गई, जब वैज्ञानिकों ने यह घोषणा की कि उन्होंने अंतत: उन गुरुत्वीय तरंगों की खोज कर ली है, जिसकी भविष्यवाणी आइंस्टीन ने एक सदी पहले ही कर दी थी. वैज्ञानिकों ने इसे एक महान उपलब्धि करार देते हुए इसकी तुलना उस […]

वाशिंगटन : अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उस समय खुशी की लहर पैदा हो गई, जब वैज्ञानिकों ने यह घोषणा की कि उन्होंने अंतत: उन गुरुत्वीय तरंगों की खोज कर ली है, जिसकी भविष्यवाणी आइंस्टीन ने एक सदी पहले ही कर दी थी.

वैज्ञानिकों ने इसे एक महान उपलब्धि करार देते हुए इसकी तुलना उस क्षण से की है, जब ग्रहों को देखने के लिए गैलीलियो ने दूरदर्शी यंत्र का आविष्कार किया था.

ब्रह्मांड में जोरदार टक्करों के कारण पैदा होने वाली इन तरंगों की खोज खगोलविदों को इसलिए उत्साहित कर रही है क्योंकि इससे ब्रह्मांड का अवलोकन उसकी क्रमबद्धता में करने का एक नया रास्ता खुल गया है. उनके लिए यह एक मूक फिल्म से बोलती फिल्मों में प्रवेश करने जैसा है क्योंकि ये तरंगें ब्रह्मांड की आवाज हैं.

कोलंबिया विश्वविद्यालय के अंतरिक्ष विज्ञानी और खोज दल के सदस्य एस मार्का ने कहा, ‘‘इस क्षण से पहले तक हमारी नजरें तो आसमान की ओर होती थीं लेकिन हम वहां का संगीत नहीं सुन पाते थे.” इस नयी खोज में खगोलविदों ने अत्याधुनिक एवं बेहद संवेदनशील लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑबजर्वेटरी या लीगो का इस्तेमाल किया, जिसकी लागत 1.1 अरब डॉलर है. लीगो की मदद से उन्होंने दूर दो ब्लैक होल के बीच हुई हालिया टक्कर में पैदा हुई गुरुत्वीय तरंग का पता लगाया.

कुछ भौतिकविदों का कहना है कि यह खोज वर्ष 2012 की हिग्स बोसॉन (गॉड पार्टिकल) जितनी बड़ी है. वहीं कुछ वैज्ञानिक इसे उससे भी बड़ी खोज कह रहे हैं.

खोज दल के सदस्यों से इतर पेन स्टेट के भौतिक विज्ञानी अभय अष्टेकर ने कहा, ‘‘इसकी तुलना सिर्फ गैलीलियो द्वारा दूरदर्शी यंत्र लेकर आने और उससे ग्रहों को देखना शुरु करने से ही की जा सकती है.”

उन्होंने कहा, ‘‘ब्रह्मांड को लेकर हमारी समझ में नाटकीय ढंग से बदलाव आया है.” गुरुत्वीय तरंगों की सबसे पहली व्याख्या आंइस्टीन ने वर्ष 1916 में अपने सापेक्षिता के सामान्य सिद्धांत के तहत की थी. ये चौथी विमा दिक्-काल में असाधारण रूप से कमजोर तरंगें हैं.

जब बड़े लेकिन सघन पिंड, जैसे ब्लैक होल या न्यूट्रॉन स्टार आपस में टकराते हैं तो उनके गुरुत्व से पूरे ब्रह्मांड में तरंगे पैदा होती हैं.

वैज्ञानिकों को 1970 के दशक में की गयी गणनाओं के आधार पर गुरुत्वीय तरंगों के अस्तित्व का अप्रत्यक्ष साक्ष्य मिला था. इस उपलब्धि को वर्ष 1993 का भौतिकी का नोबल पुरस्कार से नवाजा गया था.

बहरहाल, मौजूदा घोषणा गुरुत्वीय तरंग की सीधी पहचान से जुड़ी है. ऐसे में इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. खोज दल से इतर जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के भौतिकविद मार्क केमिओनकोव्सी ने कहा, ‘‘ध्वनि तरंगों के मौजूद होने की बात जानना एक चीज है लेकिन बीथोवेन (महान संगीतकार) के पांचवें सिंफनी को वास्तव में सुन पाना एक अलग ही बात है.”

केमिओनकोव्सी ने कहा, ‘‘ऐसे में, हम दरअसल ब्लैक होल के विलय को सुन पाएंगे.” पेनसेल्वानिया स्टेट विश्वविद्यालय के टीम सदस्य चाड हाना ने कहा, गुरुत्वीय तरंगे ‘‘ब्रह्मांड का साउंडट्रैक है.” अष्टेकर ने कहा कि गुरुत्वीय तरंगों की पहचान इतनी मुश्किल है कि जब आइंस्टीन ने पहली बार इनकी व्याख्या की थी, तब उन्होंने कहा था कि वैज्ञानिक कभी भी इन्हें सुन नहीं पाएंगे. आइंस्टीन ने बाद में खुद ही इस बात पर संदेह जताया था और यहां तक कि 1930 के दशक में सवाल भी उठाया था कि ये तरंगे हैं भी या नहीं? लेकिन 1960 के दशक में वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला था कि संभवत: इनका अस्तित्व है.

वर्ष 1979 में, नेशनल साइंस फाउंडेशन ने तरंगों की पहचान का तरीका निकालने के लिए कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को धन दिया था.

20 साल बाद, उन्होंने वाशिंगटन के हैनफोर्ड और लुइसियाना के लिविंगटन में दो लीगो संसूचक बनाने शुरु किये. इन्हें वर्ष 2001 में सक्रिय किया गया.

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