भारत-अमेरिका ने गरीबी मिटाने के लिए मिलाया हाथ

वाशिंगटन : अमेरिका ने उप सहारा अफ्रीका में गरीबी से निपटने के लिए भारत की सस्ती तकनीक की मदद लेने के लिए उसके साथ हाथ मिलाया है. विश्व बैंक के हाल में जारी आंकड़े के अनुसार उप सहारा अफ्रीका में विश्व के एक तिहाई से अधिक गरीब लोग रहते हैं जिनकी आय प्रतिदिन 1.2 डॉलर […]

वाशिंगटन : अमेरिका ने उप सहारा अफ्रीका में गरीबी से निपटने के लिए भारत की सस्ती तकनीक की मदद लेने के लिए उसके साथ हाथ मिलाया है.

विश्व बैंक के हाल में जारी आंकड़े के अनुसार उप सहारा अफ्रीका में विश्व के एक तिहाई से अधिक गरीब लोग रहते हैं जिनकी आय प्रतिदिन 1.2 डॉलर है. आंकड़ों के मुताबिक भारत में भी विश्व भर के कुल गरीबों के करीब एक तिहाई लोग रहते हैं.

यूएसएड के प्रशासक राज शाह ने कल सांसदों से कांग्रेस की बैठक में कहा, ‘‘ भारत में बड़ी संख्या में तकनीकी साङोदार हैं जिन्होंने इस प्रयास में योगदान दिया है. भारत अमेरिका के साथ ‘भविष्य का पोषण करने की साझीदारी’ के तहत उप सहारा अफ्रीका में भुखमरी दूर करने के लिए अपने संसाधनों को लगाएगा.’’

भारतीय अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने प्रश्न पूछा था कि अमेरिका कृषि के विकास एवं गरीबी कम करने के लिए किस तरह भारत की मदद कर रहा है. इसके जवाब में शाह ने कहा, ‘‘ हमें लगता है कि यह एक नए मॉडल का द्योतक है कि भारत उप सहारा अफ्रीका में गरीबी से निपटने के लिए हमारे साझीदार के तौर पर अपनी तकनीकों और व्यवसायों की मदद से बड़ी भूमिका निभा रहा है.’’

बेरा ने कहा, ‘‘मैंने भारत सरकार और कैलिफोर्निया की सरकार से बात की थी. हम भारत में खाद्य सुरक्षा के मसले सुलाझने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन मुझे यह जानकर हैरानी हुई कि भारत में जहां लाखों लोग हर रात भूखे पेट सोते हैं वहां 40 प्रतिशत खाद्य पदार्थ व्यर्थ हो जाते हैं. ’’ उन्होंने कहा कि ऐसा अधिकतर प्रशीतन गृह नहीं होने संबंधी मसलों और खाद्य सामग्री को बाजार तक ले जाने के लिए ढांचागत सुविधाओं के अभाव के कारण होता है.’’

शाह ने बताया कि दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच प्रौद्योगिकी का विस्तृत स्तर पर आदान प्रदान किया गया है. इसके अलावा भारत सरकार ने वालमार्ट जैसी अमेरिकी कंपनियों को मंजूरी देने के लिए कानून पारित कराने की भी कोशिश की है.

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