वाशिंगटन : ओबामा प्रशासन ने अमेरिकी संसद से अपील की है कि वह ईरान के खिलाफ किसी नए प्रतिबंध को पारित न करे क्योंकि इससे हाल ही में ईरानी परमाणु हथियार कार्यक्रम पर हुई संधि खतरे में पड़ सकती है.
व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जे कार्ने ने अपने दैनिक समाचार सम्मेलन में संवाददाताओं को बताया, हमारा मानना है कि कांग्रेस को नए प्रतिबंध पारित करने से अभी बचना चाहिए. अगर ईरान इस समझौते का पालन करने में विफल रहता है तो इस कदम को उठाना सकारात्मक रहेगा और अभी ऐसा करने से नकारात्मक नतीजे आ सकते हैं.बहरहाल, कार्ने ने यह नहीं कहा कि इस विधेयक पर राष्ट्रपति वीटो का इस्तेमाल करेंगे कि नहीं.
उन्होंने कहा, हम इस समय नए प्रतिबंधों को पारित करने का कड़ा विरोध करते हैं और हम कई सांसदों के साथ इस पर चर्चा में शामिल हैं. एक सवाल के जवाब में कार्ने ने कहा, हमारा मानना है कि नए प्रतिबंधों को पारित करने से ईरान और हमारे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को ऐसा संदेश जा सकता है कि हम इस संधि पर गलत तरीके से समझौते कर रहे हैं. इससे हमारे प्रतिबंधों की व्यवस्था की गलत छवि बन सकती है.
कार्ने ने कहा, हम कांग्रेस सदस्यों के साथ हुई कई बैठकों में अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं. हमारा रुख यह है कि हमने जो प्रतिबंध व्यवस्था बनाई है, उसी से हमें यह अवसर मिल सका है. ये प्रतिबंध तेहरान पर उसका व्यवहार बदलने का दबाव बनाने के लिए थे और ये ऐसा करने में सफल हुए हैं.
उन्होंने कहा, प्रतिबंधों के प्रभाव की वजह से तेहरान ने अपना व्यवहार बदला है या यह संकेत दिए हैं कि वह अपना व्यवहार बदलने के लिए तैयार है.द अमेरिका जेनेवा में पी5 प्लस 1 देशों के साथ कई समझौते कर चुका है. इन समझौतों के परिणामस्वरुप यह समूह ईरान के साथ एक प्राथमिक समझौते पर पहुंच सका. पी5 प्लस 1 देशों में अमेरिका, रुस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी शामिल हैं.
कार्ने ने कहा, अब हमें उस समझौते के क्रियांवयन पर गौर करना है. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ परमाणु कार्यक्रम पर हाल ही में हुए इस समझौते में यह पूरी तरह स्पष्ट है कि वह क्या करता है और क्या नहीं.
कार्ने ने कहा, राष्ट्रपति ने कहा है कि ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम चलाने का अधिकारी है. अगर ईरान प्राथमिक समझौते के अनुरुप काम करता है तो अगले छह माह में वह सभी मुद्दों पर गौर हो सकेगा. उन्होंने कहा, राष्ट्रपति ने यह बात बिल्कुल स्पष्ट की है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल न करने देने के मूल सिद्धांत पर पूरी तरह कायम हैं. राष्ट्रपति की नीतियों में भी यह बात साबित हुई है. उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए उनके पास सारे विकल्प खुले हैं.
