वाशिंगटन: रेनबैक्सी के औषधि कारखानों में गड़बड़ी का भंडाफोड़ करने वाले कंपनी के पूर्व अधिकारी और तथाकथित विसल ब्लोअर ने कहा है कि रैनबैक्सी लैबोरेटरीज ने औषधि उत्पादन के स्वस्थ मानदंडों का उल्लंघन किया है.
इसी व्यक्ति के संकेत पर अमेरिका में कंपनी की जांच हुई और उसे किये जाने पर कंपनी के खिलाफ अमेरिका में जांच हुई और उसे 50 करोड़ डालर भुगतना पड़ा है.
अमेरिकी अधिकारियों और भारतीय कंपनी के बीच मामले के निस्तारण के लिए हुए समझौते के एक दिन बाद इस अधिकारी ने कंपनी की व्यवस्था में गड़बड़ी का ब्यौरा अपनी जुबान से सार्वजनिक किया है.
इस विवाद से जुड़ी कंपनी की अमेरिकी बाजार में बेची जाने वाली जेनेरिक दवाएं उसके पोंटा साहिब तथा देवास में स्थित विनिर्माण इकाई में बनती हैं. इसमें मंहासे, मिर्गी और नसों में दर्द की दवाएं शामिल हैं.
रैनबैक्सी के एक पूर्व अधिकारी दिनेश ठाकुर ने बयान में कहा, ‘‘आठ साल पहले रैनबैक्सी में परियोजना निदेशक तथा सूचना प्रबंधन के रुप में मैंने पाया कि कंपनी दवा आंकड़ों के साथ हेरफेर करती है और विनिर्माण तथा प्रयोगशाला मानदंडों का उल्लंघन करती है.’’ ठाकुर अब अमेरिका में रह रहे हैं.
जब रैनबैक्सी इन गड़बड़ियों को दूर करने में विफल रहीं तो उन्होंने अमेरिका के स्वास्थ्य अधिकारियों को इस बारे में सतर्क किया. दवा कंपनी पर औषधि सुरक्षा से संबंधित आरोप लगे और मामले के निपटान के लिये अमेरिकी न्याय विभाग के साथ हुए समझौते के तहत कंपनी 50 करोड़ डालर का जुर्माना भरेगी.
न्यू जर्सी के बेले मिएड में रहने वाले ठाकुर को 50 करोड़ डालर में 4.86 करोड़ डालर मिलेंगे.
