इस्लामाबाद : बेनजीर भुट्टो हत्याकांड मामले में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की न्यायिक हिरासत अवधि को आज आतंकवाद विरोधी अदालत ने और एक पखवाड़े के लिए बढ़ा दिया. रावलपिंडी में न्यायाधीश चौधरी हबीबउर्र रहमान की अदालत ने मुशर्रफ की न्यायिक हिरासत 28 मई तक बढ़ा दी और साथ ही उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई को 20 मई के लिए स्थगित कर दिया. अभियोजन पक्ष के वकील चौधरी अजहर ने संवाददाताओं को यह जानकारी दी.
भुट्टो हत्याकांड की अगली सुनवाई 28 मई को होगी. मुशर्रफ के वकील सलमान सफदर आज की सुनवाई में शामिल नहीं हुए. 2008 के मुंबई बम हमलों और भुट्टो हत्याकांड को देख रहे मुख्य वकील चौधरी जुल्फिकार अली को तीन मई को इस्लामाबाद में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा गोली मारे जाने के बाद मामले की यह पहली सुनवाई थी.
69 वर्षीय मुशर्रफ पर आरोप है कि वह दो बार प्रधानमंत्री रहीं बेनजीर भुट्टो को स्व निर्वासन से पाकिस्तान लौटने पर पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रहे. भुट्टो की दिसंबर 2007 में रावलपिंडी में एक चुनावी रैली को संबोधित किए जाने के दौरान आत्मघाती हमले में मौत हो गयी थी. पूर्व सैन्य शासक 11 मई को हुए आम चुनाव में अपनी पार्टी की अगुवाई करने के लिए स्व निर्वासन से लौटे थे लेकिन पेशावर हाई कोर्ट ने उन पर आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगा दिया.
मुशर्रफ 2007 में आपातकाल के दौरान जजों को बर्खास्त किए जाने तथा 2006 में सैन्य अभियान में बलूच नेता अकबर बुगती की हत्या के संबंध में भी आरोपों का सामना कर रहे हैं. कई मामलों में उनकी गिरफ्तारी के बाद मुशर्रफ को इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में उनके फार्महाउस पर रखा गया है जिसे प्रशासन ने ‘‘उप जेल’’ घोषित कर दिया है.
