बेरुत :लेबनान में एक शरणार्थी परिवार के साथ कुछ ऐसा हुआ जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. जब एक समाजिक कार्यकर्ता गिसूर सैमरसन ने शरणार्थी अब्दुल की हृदय विदारक तसवीर ट्विटर पर पोस्ट की. तो हजारों लोग इसके मदद के लिए आगे आये. इस तसवीर में अब्दुल अपने सोयी हुई बेटी को कंधे में लेकर सड़कों पर कलम बेच रहे है. अब्दुल के पास इतने पैसे नहीं थे कि वो अपना और अपनी बेटी का भोजन जुटा सके.
ट्विटर का कमाल ...शरणार्थी बाप-बेटी के मदद के लिए 15 घंटे में जुगाड़ हुआ 45000 डॉलर
बेरुत :लेबनान में एक शरणार्थी परिवार के साथ कुछ ऐसा हुआ जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. जब एक समाजिक कार्यकर्ता गिसूर सैमरसन ने शरणार्थी अब्दुल की हृदय विदारक तसवीर ट्विटर पर पोस्ट की. तो हजारों लोग इसके मदद के लिए आगे आये. इस तसवीर में अब्दुल अपने सोयी हुई बेटी को कंधे […]

नार्वे के रहने वाले समाजिक कार्यकर्ता गिसूर ने 25 अगस्त को अब्दुल की तसवीर पोस्ट की जिसके बाद से यह तसवीर सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा शेयर की गयी. ट्विटर पर उसने # Buy Pens नाम से लोगों से सहयोग की अपील की.
30 मिनट के अंदर ही किसी शख्स ने गिसूर से संपर्क किया और उस शरणार्थी के बारे में बताया. चार घंटे के अंदर इस बात की पहचान हो गयी कि वो शख्स अब्दुल है और उसके साथ साढ़े चार साल की बेटी रीमा है. समाजिक कार्यकर्ता गिसूर ने मदद के लिए एक पेज बनाया. जिसके माध्यम से शरणार्थी अब्दुल को आर्थिक मदद पहुंचाया जा सके. मात्र तीन घंटे के अंदर 17000 डॉलर इकट्ठा हो गया. प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक 45000 डॉलर इकट्ठा चुका है.