वाशिंगटन : अमेरिका ने चीन से कहा है कि वह दलाई लामा और तिब्बत के अद्वितीय सांस्कृतिक, भाषाई तथा धािर्मक परंपराओं को लेकर निंदात्मक बयानों से परहेज करे.
अमेरिका ने साथ ही कहा कि तिब्बतियों को अपनी चिंताओं को स्वतंत्रता से व्यक्त करने की अनुमति होनी चाहिए.
विदेश विभाग के प्रवक्ता पैट्रिक वेंट्रेल ने कल संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हमने चीन सरकार से दलाई लामा और तिब्बत के अद्वितीय सांस्कृतिक, भाषाई तथा धार्मिक परंपराओं को लेकर निंदात्मक बयानों से बचने के लिए कहा है.
उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि तिब्बत को लेकर हमारी नीति बदली नहीं है. हम चीन सरकार से मांग करते हैं कि तिब्बतियों को अपनी चिंताएं स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण और बिना किसी दमन के डर से व्यक्त करने की अनुमति होनी चाहिए.
बेरा ने कहा, ‘‘ओक क्रीक घटना की यादें अभी भी ताजा हैं, और एल्क ग्रोव के मेरे खुद के समुदाय में भी, दो सिख लोगों की 2011 में संदिग्ध घृणा अपराध में हत्या कर दी गई थी. अमेरिकी सिख समुदाय के प्रति हिंसा और भेदभाव का मुद्दा अमेरिका में एक वास्तविक और नागरिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए मैंने इस साल के शुरु में घृणा अपराध के खिलाफ एक मजबूत कानून का समर्थन किया था, और इसी कारण मैं अमेरिकी सिख समूह में शामिल हुआ, ताकि यहां अमेरिका में नागरिक अधिकारों के मुद्दों पर काम किया जा सके.’’
कॉकस में शामिल होने की वजह को उचित ठहराते हुए उन्होंने कहा, ‘‘दुख है कि, इस हफ्ते अमेरिका में इन मुद्दों से जुड़ी एक और घटना हो गई जब फ्रेसनो शहर में, जो मेरे जिले से दूर नहीं है, एक सिख व्यक्ति पर बुरी तरह हमला किया गया. हमें इस तरह की हिंसा को रोकने और शांति के लिए विविध संस्कृतियों, धर्मों और पंथों के देश के रुप में मिलकर काम करना चाहिए. इन्हीं मुद्दों पर अमेरिकी सिख कांग्रेसनल कॉकस काम करेगा.’’ यहां भारतीय दूतावास ने उल्लेख किया है कि वह अमेरिका में सिख समुदाय के लोगों से जुड़े मुद्दों के प्रति सजग है. इसने कहा है कि वह नए कांग्रेसनल कॉकस के साथ मिलकर काम करने की उम्मीद करता है.
