ह्यूस्टन : अमेरिका की एक सैन्य अदालत ने वर्ष 2009 में टैक्सास के फोर्टहुड में गोलीबारी कर 13 लोगों को मार डालने और 32 अन्य को घायल कर देने के मामले में सेना के मनोचिकित्सक निदाल मलिक हसन को मौत की सजा सुनाई है.इस हमले को अमेरिकी इतिहास में किसी घरेलू सैन्य शिविर पर होने वाला अब तक का सबसे घातक हमला माना जाता है.
हसन को दोषी ठहराने वाली 13 सदस्यीय ज्यूरी ने कल उसे मौत की सजा सुनाई और उसकी सैन्य तनख्वाह भी बंद कर दी. मुकदमे के दौरान वह लगातार तनख्वाह पा रहा था. उसे सेना से भी निकाल दिया गया.अधिकारियों ने बताया कि उसे कंसास के फोर्ट लीवनवर्थ स्थित सैन्य जेल में स्थानांतरित किया जाएगा.
हसन ने 13 वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के पैनल द्वारा सुनाए गए एकमत फैसले को खामोशी के साथ सुना. इन अधिकारियों में से यदि कोई एक भी इस फैसले पर आपत्ति जताता तो हसन को उम्रकैद की सजा मिलती.
अगले महीने वह 43 साल का हो जाएगा. हसन को गोलीबारी कर पूर्वनियोजित हत्याएं करने और 32 पूर्वनियोजित हत्याओं के प्रयास के 13 आरोपों में दोषी पाया गया था. यह घटना 5 नवंबर 2009 को हुई थी जब उसने फोर्टहुड के सैनिक तैयारी प्रक्रिया केंद्र में अचानक गोलीबारी कर दी. उस समय वहां सैनिक अफगानिस्तान में तैनाती के लिए जाने से पहले चिकित्सीय परीक्षण करा रहे थे.कुछ सप्ताह बाद सेना के इस मनोचिकित्सक को भी अफगानिस्तान में तैनात होना था. हसन ने सैनिकों पर उच्च क्षमता वाली हैंडगन से हमला किया था.
