इस्लामाबाद : पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने पाकिस्तान और भारत के बीच वार्ता बहाल करने की जरुरत पर जोर देते हुए कहा कि नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम के उल्लंघन की हाल की घटनाओं को दोनों देशों के बीच के रिश्ते सामान्य बनाने वाली प्रक्रिया को पटरी से उतारने की इजाजत नहीं दी जाए.जरदारी ने कल कहा, ‘‘हम मानते हैं कि दोनों देशों के लिए आगे का रास्ता रुकी हुई समग्र वार्ता प्रक्रिया बहाल करना है.’’
पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश भारत के साथ अपने द्विपक्षीय रिश्तों को लंबित विवादों को हल कर के एक दोस्ताना और सहयोगात्मक साङोदारी में बदलना चाहता है.बहरहाल, जरदारी ने कहा कि दोनों पक्षों का यह सुनिश्चित करने की जरुरत है कि नियंत्रण रेखा पर की हाल की घटनाएं शांति प्रक्रिया को पटरी से नहीं उतारें.
जरदारी ने कहा, ‘‘हमारी नई लोकतांत्रिक सरकार ने संयम बरता है.’’उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री :नवाज शरीफ: भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंधों के लिए प्रतिबद्ध हैं और कहा है कि उनकी सरकार संयम बरतना जारी रखेगी.’’
जरदारी ने यह टिप्पणी कल शाम राष्ट्रपति प्रासाद में इस्लामाबाद स्थित राजदूतों के सम्मान में आयोजित एक भोज में की. इसका आयोजन पिछले पांच साल के दौरान उनके समर्थन और सहयोग पर शुक्रिया अदा करने के लिए किया गया था.
जरदारी आठ सितंबर को अपने पद से मुक्त हो जाएंगे. इसके बाद, ममनून हुसैन पाकिस्तान के 12वें राष्ट्रपति के रुप में पदभार संभालेंगे.उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने पड़ोस में ईमानदारी से टिकाउ शांति और स्थिरता स्थापित करना चाहता है.
पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘विविध क्षेत्रों में परस्पर लाभकारी सहयोग की अपार संभावनाएं साकार करने के लिए हमें शांति और स्थिरता की आवश्यकता है.उन्होंने अफगान नीत एवं अफगान स्वामित्व वाली संक्रमण प्रकिया के प्रति अपना समर्थन दोहराया.
जरदारी ने कहा, ‘‘हम अंतर-अफगान सुलह-सफाई के प्रयासों को हर संभव समर्थन दे रहे हैं.’’ भोज में राजनयिकों के अतिरिक्त पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, सीनेट के अध्यक्ष, कौमी असेंबली के स्पीकर, संघीय मंत्रियों और सांसदों ने हिस्सा लिया.
जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान में लोकतंत्र जड़ें जमा रही हैं क्योंकि यह देश के इतिहास में पहला मौका है जब कोई निर्वाचित असैनिक राष्ट्रपति किसी अन्य निर्वाचित असैनिक राष्ट्रपति को सुगम तरीके से जिम्मेदारियां सौंप रहा है.
